शब-ए- कद्र की रात में दी जाती है माफी
महराजगंज। रमजान के पवित्र महीने में बुधवार 23 रमजान के रोजे पूरे हो गए। रमजान के महीने में जिस रोजेदार ने पूरे महीने पांच वक्त की नमाज नियमित रूप से पढ़ी। रात में तराबी की नमाज पढ़ी। रमजान के महीने में गरीबों-यतीमों को रोजा इफ्तार कराया, उनके लिए कपड़े बनवाए, अपनी कमाई का हिस्सा निकाला। अल्लाह को खुश करने के लिए इबादत की। ऐसी इबादत को अल्लाह पसंद करता है।
सिंदुरिया मस्जिद के इमाम हाजी मोहम्मद हुसैन निजामी के अनुसार रमजान के महीने में 26 रोजे के बाद एक ऐसी रात आती है, जिसे शब-ए-कद्र की रात कहते हैं, जो हजार रातों से बेहतर होती है। यह रोजेदारों के लिए अनमोल तोहफा है। कुरान पाक में इस रात की बड़ी विशेषता बताई गई है।
अकीदत और ईमान के साथ इस रात में इबादत करने वालों के पिछले गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मोहम्मद साहब ने शब-ए-कद्र के लिए रमजान की 21, 23, 25, और 29 वीं रात बताई है। इन रातों में रातभर इबादत की जाती हैं, जिनमें नमाज पढना, कुरान शरीफ पढ़ना, अल्लाह के नाम को पढ़ना अहम है।
रमजान में खुदा की रहमत पूरे जोश पर होती है। शब-ए- कद्र यानी हजार रातों से बेहतर रात। इस रात में कुरान उतारी गई थी। इसी रात में अनगिनत लोगों को माफी दी जाती है। इसीलिए इस्लाम में पूरी रात जागकर इबादत की जाती है।