जमीन के मसले पर हुई पंचायत में नहीं बनी बात
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फरेंदा/कोल्हुई(महराजगंज)। फरेंदा व नौतनवां के बीच में पड़ने वाले श्रीनगर ताल पर पुल निर्माण के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों की तरफ से बुलाई गई पंचायत बेनतीजा रही। किसानों का कहना था कि पुल के निर्माण के लिए उनकी जो जमीन ली जाएगी, उसके बदले उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए, साथ ही पुल का भी निर्माण होना चाहिए। उधर, अधिकारियों का कहना था कि ताल में जल संचयन के बाद पुल तो बनवाएंगे लेकिन जमीन के बदले कोई रकम संबंधित किसानों को न दे पाएंगे।
पंचायत में सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता एसके वर्मा ने बताया कि ग्रामीणों के आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए पुल निर्माण के लिए परियोजना समिति के समक्ष यह बात रखी गई। जिस पर समिति द्वारा ताल में पूर्व की भांति जल संचयन के बाद ही पुल निर्माण पर सहमति बनी है। उन्होंने जमीन के बदले मुआवजा न देने की बात भी कही। इस बात को सुनते ही ग्रामीण भड़क गए। किसानों का कहना था कि अंग्रेजों के समय में पुल बना था। उस दौरान अंग्रेजों ने जमीन ले लिया था। अब किसान अपनी एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। जिला पंचायत सदस्य सुरेश सहानी ने कहा कि पुल टूट जाने से अगल-बगल के दो दर्जन से ज्यादा गांवों के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चे जान जोखिम में डाल कर विद्यालयों में पढ़ने जाते हैं। किसी अप्रिय घटना के समय एंबुलेंस भी समय से नहीं पहुंच पाता है। ग्रामीणों की समस्याओं को देखते हुए पुल निर्माण जरूरी है। जुगानी जायसवाल ने कहा कि पुल निर्माण के लिए जमीन मुआवजा मिले बगैर नहीं दी जाएगी। उधर, किसानों के तीखे तेवर अधिकारी किसी निर्णय के बगैर लौट गए। बैठक में तहसीलदार फरेंदा अशोक कुमार गुप्ता, सहायक अभियंता राजेश गुप्ता, अवर अभियंता शंभुनाथ कुशवाहा, जिला पंचायत सदस्य गयासुद्दीन, रामकेवल साहनी, क्रांति, ओमप्रकाश मौर्य, हरीराम, गनेश प्रसाद, शंभू साहनी, बदरुद्दीन खान, जगदीश, कमरुद्दीन, संतोष आदि मौजूद रहे।