फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुपोषण दूर करने में स्टाफ की कमी बनी बाधा

विज्ञापन
पोषण पुनर्वास केंद्र। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
महराजगंज। जिले में कुपोषण से जंग लड़ने में बाल विकास विभाग के सामने समस्याएं आ रही हैं। स्टाफ की कमी से जूझ रहे विभाग के लिए कुपोषण दूर करना चुनौती है। जिले में 3133 सेंटर संचालित हैं। सर्वे के मुताबिक करीब 9000 बच्चे कुपोषित मिले हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पुष्टाहार देकर कुपोषण दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2017 में करीब 16000 बच्चे कुपोषित मिले थे। विभागीय प्रयास से अब 9000 बच्चे कुपोषित रह गए हैं। ज्यादा गंभीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है।  
विज्ञापन

कुपोषण से बचाव के लिए जिले में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। स्टाफ की कमी से कार्यों को करने में परेशानी हो रही है। विभाग के अनुसार स्वीकृत पद के सापेक्ष तैनाती नहीं है। 13 बाल विकास विकास परियोजना अधिकारियों के सापेक्ष महज छह की तैनाती है। इसी तरह सुपरवाइजर के 114 पद के सापेक्ष महज 55 सुपरवाइजर की तैनाती है। 2613 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तैनात हैं। जबकि जरूरत 2722 की है। इस वजह से कुपोषण से जंग लड़ने में अड़चन आ रही है। ज्यादा कुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। इन दिनों पोषण पुनर्वास केंद्र की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। पोषण पुनर्वास केंद्र 10 बेड का है। यहां छह कुपोषित बच्चे भर्ती हैं। विभाग की ओर से शबरी संकल्प, पुष्टाहार और कुपोषण मुक्ति जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी ब्रजेंद्र कुमार जायसवाल ने बताया कि विभाग के पास जो व्यवस्था है। उसी में बेहतर कार्य करने का प्रयास किया जा रहा है। कुपोषण को दूर करने के लिए विभाग की योजनाओं के माध्यम से लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें