महराजगंज। पिछले माह नेपाल की बाढ़ से दियारा क्षेत्र में किसानों की जमापूंजी पानी में बह गई। दियारा क्षेत्र के 2456.566 हेक्टेयर कृषि रकबे में लगी धान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। सरकार ने 1300 किसानों को आपदा राहत के रूप में मदद तो दी है लेकिन फसल बीमा योजना के तहत अब तक एक भी रुपया क्षतिपूर्ति के रूप में नहीं मिल सका है।
जिले में खरीफ सीजन 2026 के लिए कुल 46520 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल का बीमा कराया था। इसमें सबसे अधिक प्रभावित निचलौल तहसील का दियारा क्षेत्र है। यहां गंडक और नारायणी नदी के उफान से लगातार दूसरी बार बाढ़ आई और खेतों में लगी तैयार धान की फसल पानी में सड़ गई। किसानों ने कर्ज लेकर खाद-बीज और दवा डाली थी, सब बर्बाद हो गया।
किसानों का कहना है कि जब बीमा कराया था तो भरोसा था कि नुकसान होने पर भरपाई हो जाएगी। लेकिन बीमा कंपनी क्रॉप कटिंग के बाद ही दावे पर विचार करने की बात कह रही है, जबकि खेतों में फसल का नामोनिशान नहीं बचा है। भोथहां के किसान अलगू, शिकारपुर के मोबिन और सोहगीबरवां के रामप्रसाद का कहना है कि खेत में कुछ बचा ही नहीं तो कटिंग क्या होगी। सरकार को बीमा कंपनी से विशेष सर्वे कराकर त्वरित क्षतिपूर्ति का दबाव फसल बीमा कंपनी पर बनाना चाहिए, लेकिन इसपर कृषि महकमा ही मौन है।