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Maharajganj News: बारिश से पारा लुढ़का, जलभराव से सांसत

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देवरिया। बृहस्पतिवार की दोपहर करीब 12 बजे से शाम चार बजे तक रुक-रुककर हुई बारिश ने गर्मी से कुछ राहत दी मगर शहर में जलभराव और जाम ने लोगों की मुश्किल बढ़ा दी।
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बुधवार को अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस था, जबकि बृहस्पतिवार के लिए यह करीब 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। बारिश और बादलों के कारण दिन के तापमान में दो डिग्री की गिरावट देखने को मिली।
बारिश के दौरान शहर की सड़कों पर कई स्थानों पर पानी भर गया। पैदल राहगीरों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ा। कई लोग पैंट ऊपर कर जलभराव पार करते दिखाई दिए।
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दुकानों और पेड़ों की आड़ लेकर लोग बारिश थमने का इंतजार करते रहे, जबकि तमाम राहगीर और स्कूली बच्चे भीगते हुए निकले। बारिश के बीच आवाजाही कम हुई, लेकिन जैसे ही कुछ देर के लिए पानी बरसना बंद हुआ, एक साथ बड़ी संख्या में वाहन सड़कों पर आ गए।
खेती के लिहाज से बारिश का असर फसल और खेत में पानी की स्थिति पर निर्भर करेगा। धान की फसल के लिए इस समय पानी की जरूरत रहती है, इसलिए सामान्य बारिश से सिंचाई की जरूरत कम हो सकती है।
हालांकि, खेतों में ज्यादा समय तक पानी जमा रहने की स्थिति में सब्जियों और अन्य जलभराव के प्रति संवेदनशील फसलों को नुकसान हो सकता है।
बारिश से पारा लुढ़का, जलभराव से सांसत

देवरिया। बृहस्पतिवार की दोपहर करीब 12 बजे से शाम चार बजे तक रुक-रुककर हुई बारिश ने गर्मी से कुछ राहत दी मगर शहर में जलभराव और जाम ने लोगों की मुश्किल बढ़ा दी। बुधवार को अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस था, जबकि बृहस्पतिवार के लिए यह करीब 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। बारिश और बादलों के कारण दिन के तापमान में दो डिग्री की गिरावट देखने को मिली।बारिश के दौरान शहर की सड़कों पर कई स्थानों पर पानी भर गया। पैदल राहगीरों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ा। कई लोग पैंट ऊपर कर जलभराव पार करते दिखाई दिए। दुकानों और पेड़ों की आड़ लेकर लोग बारिश थमने का इंतजार करते रहे, जबकि तमाम राहगीर और स्कूली बच्चे भीगते हुए निकले। बारिश के बीच आवाजाही कम हुई, लेकिन जैसे ही कुछ देर के लिए पानी बरसना बंद हुआ, एक साथ बड़ी संख्या में वाहन सड़कों पर आ गए। खेती के लिहाज से बारिश का असर फसल और खेत में पानी की स्थिति पर निर्भर करेगा। धान की फसल के लिए इस समय पानी की जरूरत रहती है, इसलिए सामान्य बारिश से सिंचाई की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, खेतों में ज्यादा समय तक पानी जमा रहने की स्थिति में सब्जियों और अन्य जलभराव के प्रति संवेदनशील फसलों को नुकसान हो सकता है।
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