फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharajganj News: रमजान में ही तरावीह की नमाज संभव

विज्ञापन
विज्ञापन
महराजगंज। इस्लाम में तरावीह को विशेष नमाज का दर्जा प्राप्त है। खास बात यह है कि इसे सिर्फ रमजान के पाक (पवित्र) महीने में ही अता किया जा सकता है। सिर्फ रमजान में ही इसे पढ़ने की शर्त इसे खास बनाती है।
विज्ञापन

मदरसा जामिया रिजविया नूरुल उलूम के नाजिम (मैनेजर) नुरुल हुदा खान ने बताया कि यह विशेष नमाज सुन्नत (हजरत मोहम्मद के कथनों, क्रियाओं व आदतों का संग्रह) पर आधारित है। रमजान के महीने में हर रात ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाने वाली एक स्वैच्छिक नमाज है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुन्नत है। इसलिए दुनिया भर की मस्जिदों में इस मुबारक महीने की हर रात पुरुषों और महिलाओं के लिए सामूहिक तरावीह की नमाज अदा की जाती है। सिसवां के मौलाना खुश मोहम्मद ने बताया कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि रमजान में सच्चे ईमान और सवाब की उम्मीद से ऐच्छिक नमाज अता की जाती है।
यह नमाज काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुराने गुनाह माफ होते हैं। सिसवां के मौलाना हारुन ने बताया कि ईशा की फर्ज नमाज़ के उपरांत 4 रकात नमाज पढ़ने मस्जिद जरूर जाएं। उन्होंने बताया कि रकात का अर्थ चक्र के मार्फत आसानी से समझा जा सकता है। एक तरह से इसे शारीरिक क्रिया करते हुए नमाज अता किए जाने का प्रावधान है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें