फ्लू, वायरल फीवर व सर्दी-खांसी से पीड़ित मरीज पहुंच रहे अस्पताल
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में 624 रोगियों का हुआ उपचार
महराजगंज। सर्दियों में रोगियों की संख्या में लगाता इजाफा हो रहा है। फ्लू, वायरल फीवर व सर्दी-खांसी के रोगियों की संख्या अक्तूबर के अंतिम सप्ताह से अब तक लगातार बढ़ रही है। ठंड जनित रोग समाप्त नहीं हो रहे हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सक इसके लिए रोगियों को ही जिम्मेदार मान रहे हैं। उनका कहना है कि खुद चिकित्सक बनने के चक्कर में लोग खांसी, सर्दी, बुखार की गंभीरता न समझकर बिना परामर्श व जांच के ही उपचार शुरू कर रहे हैं। जब स्थिति बिगड़ने लगती तब अस्पताल पहुंचते हैं। इस वजह से बीमारी को ठीक होने में वक्त लगता है।
बृहस्पतिवार को 624 रोगियों का जिला अस्पताल में उपचार हुआ। अधिकतर सर्दी जनित बुखार, खांसी, फ्लू के रोगी देखे गये। डाॅ. रंजन ने बताया की आम सर्दी-जुकाम के साथ-साथ ठंड का प्रभाव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है। इससे वायरल संक्रमण, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, अस्थमा और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। ठंड में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, लेकिन आमतौर पर खासी जुकाम, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द को मरीज बदलते मौसम को प्रभाव समझकर मेडिकलों से सस्ती दवाएं खरीद लेते रहें है। जबकि बिना जांच व परामर्श के दवा नहीं प्रयोग करना चाहिए। क्योंकि एक ही रोग के लक्षण दो व्यक्तियों में अलग-अलग हो सकते हैं। लक्षण सिर्फ चिकित्सक ही समझ सकते हैं।
लक्षणों की पहचान चिकित्सक का कार्य
सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी बताते हैं कि ठंड में अचानक थकान, सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न, हाथ-पैर सुन्न होना या लगातार खांसी जैसे लक्षणों को सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं। ऐसे लक्षण गंभीर संक्रमण या दिल संबंधी समस्याओं का संकेत हैं। चिकित्सक ही इसे समझकर उपचार बता सकते हैं। ठंड के मौसम में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। बिना सलाह के उपचार शुरू करने से बचना चाहिए।
ऐसे सर्दी जनित रोगों से बचाव
- ठंड में अचानक थकान, सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न, हाथ-पैर सुन्न महसूस हो तो जांच जरूरी है।
- लगातार खांसी गंभीर संक्रमण या दिल संबंधी समस्याओं का संकेत भी हो सकते हैं। एक सप्ताह से अधिक खांसी की जांच जरूरी है।
- ठंड के दिनों में गर्म पानी का न सिर्फ सेवन करें बल्कि स्नान में गर्म पानी प्रयोग करें।
- शरीर को ठंडी हवाओं से सुरक्षा रखें। गले व पैर में सबसे अधिक ठंड प्रभावित करती है। ऊनी मोजा व टोपी धूप में भी लगाकर रखें।
- ठंडे खाद्य से परहेज करें। गर्म व ताजा भोजन की आदत डालें। किसी तरह की स्वास्थ्य असुविधा महसूस हो तो जांच व सलाह के बाद ही दवा उपचार शुरू करें।