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Maharajganj News: 1360 किमी पैदल चलकर भगत सिंह की समाधि पर श्रद्धांजलि देगा सूर्या

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12 फरवरी को सिसवा कस्बे निकले युवक की यात्रा का 23 मार्च को पंजाब के हुसैनीवाला में होगा समापन
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यात्रा के 11वें दिन 650 किलोमीटर की दूरी तय करके बरेली तक पहुंच चुका है सूर्या
भगत सिंह द्वारा कम उम्र में देश के लिए शहादत देने की वजह से उनको आदर्श मानता है सूर्या
सिसवा बाजार। कस्बे के एक युवा शहीद-ए-आजम भगत सिंह की समाधि पर श्रद्धांजलि देने 1360 किलोमीटर पैदल यात्रा पर निकल चुका है। इस यात्रा का समापन शहीद दिवस के दिन 23 मार्च को पंजाब के हुसैनीवाला में स्थित शहीद भगत सिंह की समाधि पर होगा। रविवार को यात्रा के 11वें दिन सूर्या 550 किलोमीटर की दूरी तय करके बरेली तक पहुंच चुका है।


शहीद भगत सिंह के बारे जानने और उनके विचारों को पढ़ने के बाद सिसवा कस्बे का सूरज रावत उर्फ सूर्या (25) 12 फरवरी को 1360 किमी पैदल यात्रा पर निकल चुका है। सूर्या ने अपने यात्री की शुरुआत गोरखपुर से की है। सूर्या शहीद-ए-आजम भगत सिंह को अपना प्रेरणास्रोत मानता है। वह बतात है कि अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ क्रांतिकारी विचारों का बीज बोने वाले को भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए मात्र 23 वर्ष की उम्र में अपनी शहादत दे दी थी। सूर्या के अनुसार, वह भगत सिंह की कुर्बानी से प्रेरणा लेकर देश के युवाओं को जागृत करना चाहते हैं। 550 किलोमीटर की दूरी तय कर बरेली पहुंचे सूर्या के पैरों में कई छाले पड़ चुके हैं। लेकिन लोगों से मिल रहे सहयोग और सम्मान की वजह से उसका जोश और उत्साह बना हुआ है।
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सूर्या ने दूरभाष पर बताया कि वह इस समय लखनऊ होते हुए बरेली तक पहुंच चुके हैं। सूर्या प्रतिदिन औसतन 50 किलोमीटर की यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैंने भारत माता के सच्चे सपूतों और आजादी के दीवानों का नमन करने के लिए यह यात्रा आरम्भ की है। मेरा बचपन से शहीद भगत सिंह के क्रांतिकारी जज्बे से जुड़ाव रहा है। इसीलिए मैंने उनकी समाधि पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देने का निर्णय लिया। मेरा मकसद देश में फैली नफरत को दरकिनार कर युवाओं को आजादी के योद्धाओं का इतिहास पढ़ने और उनके पदचिह्नों पर चलकर देश को एकजुट करने के साथ देश-प्रेम की जगाना है। ताकि हम सब धर्म-जाति से ऊपर उठ कर देश की सेवा करें और दुनिया में भारतीय संस्कृति और एकता का मिशाल कायम करें।
सूर्या के पिता आत्मा प्रसाद एक व्यवसायी हैं। माता संगीता देवी गृहणी हैं। सूर्या की दो वर्ष पूर्व दीपा से शादी हुई थी। दोनों का एक साल का पुत्र युवान है। सूर्या ताइक्वांडो खिलाड़ी हैं। पहले वह स्कूली बच्चों को प्रशिक्षण देते थे। फिलहाल एक जिम संचालित कर ट्रेनिंग देने लगे। सूर्या यात्रा आरम्भ करने के बाद लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।
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जज्बे का लोग कर रहे सम्मान
सूर्या ने बताया कि पैदल यात्रा के दौरान उसे लोगों का काफी सहयोग मिल रहा है। लोगों को जब उसके उद्देश्य के बारे में पता चल रहा है तो कोई उसे खाने को दे रहा है तो कोई अपने रात गुजारने के लिए निमंत्रित कर रहा है। इतना ही नहीं लोग होटल या ढाबों पर उसके खाने का बिल भी चुका दे रहे हैं।
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