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Maharajganj News: ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से फेरी व्यवसायी की मौत

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सिसवा मृतक मोहन की मौत पर सिसवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लगी भीड़। 
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सबया रेलवे क्रॉसिंग के समीप हुआ हादसा, दुर्घटना के बाद मौके से भाग या ट्रैक्टर चालक
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ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर के बाद सड़क पर गिर पड़े मोहन, उनके ऊपर ही पलट गई गाड़ी


सिसवा बाजार। सिसवा-निचलौल मुख्य मार्ग पर सबया रेलवे क्राॅसिंग के पास अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्राॅली की चपेट में आने से बृहस्पतिवार की रात गोपाल नगर निवासी मोहन वर्मा (45) की मौत हो गई। हादसे के बाद ट्रैक्टर चालक मौके से भाग गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार, बृहस्पतिवार को सिसवा कस्बे के गोपाल नगर निवासी मोहन वर्मा (45) बहुआर बाजार से अगरबत्ती बेच कर लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मोहन वर्मा जैसे ही सबया रेलवे क्रॉसिंग से निकले तभी सिसवा की ओर से आ रही एक अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उनके बाइक को टक्कर मार दिया। बाइक को टक्कर लगते ही वह सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद ट्रैक्टर ट्रॉली उनके ऊपर ही पलट गया। ट्रैक्टर के नीचे दबे मोहन को स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला और एंबुलेंस से सिसवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिजवाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मोहन को मृत घोषित कर दिया। इस दौरान ट्रैक्टर चालक मौके से भाग गया।
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सूचना पर पहुंची कोठीभार पुलिस शव को कब्जे में लेकर विधिक कार्यवाही में जुट गई। इस संदर्भ में प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि शव को कब्जे में ले लिया गया है। अभी तहरीर नहीं मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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पांच बच्चों सिर से उठा पिता का साया



कस्बे के गोपालनगर निवासी मोहन वर्मा फेरी लगाकर अगरबत्ती बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। वह अपने पीछे पांच बच्चों को छोड़ गए हैं। इनमें तीन बेटियां और दो बेटे हैं। इस दुर्घटना से परिवार पर वज्रपात हो गया है। मोहन की पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। मोहन की बड़ी बेटी नीलम (22) बीए अंतिम व संजना (20) बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है जबकि छोटी बेटी सोनम (16) कक्षा नौवीं में पढ़ती है। बेटा अमित (18) पढ़ाई छोड़कर पिता के काम में हाथ बंटाता है। छोटा बेटा सुमित (12) भी पढ़ाई कर रहा है। मोहन उनकी इच्छा थी कि पढ़ाई के बाद नीलम व संजना का जल्दी विवाह कर दें। इसके लिए वे दिन-रात मेहनत करते थे। जो भी काम मिलता था उसे करने में परहेज नहीं करते थे। दुर्घटना के बाद से परिवार पर आजीविका का संकट गहरा गया है।
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