किशोरा अवस्था में पढ़ाई-लिखाई छोड़कर गलत दिशा में भटकाव होने से परिजन भी सांसत में
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। कम उम्र में बहकते कदमों से पुलिस की सिरदर्द बढ़ गई है। गलत संगत में आकर किशोरियां घर छोड़ दे रही हैं। चार माह में तमाम ऐसी घटनाएं हुई हैं। इन मामलों में पुलिस केस दर्ज कर किशोरियों की तलाश कर रही है। किशोरा अवस्था में पढ़ाई-लिखाई छोड़कर गलत दिशा में भटकाव होने से परिजन भी सांसत में हैं।
पढ़ाई के दौरान भटकाव होना कॅरियर को तबाह कर दे रहा हैं। किशोरियां अपने हिसाब से काम करने की सोच को सही मानते हुए कदम आगे बढ़ा रहे हैं तो इसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ रहा है। चार माह के आंड़कों पर नजर डाले तो युवकों के झांसे में आने वाली किशोरियां घर-परिवार छोड़कर उनके साथ जा चुकी हैं। परिजन भी खोजकर थकने के बाद केस दर्ज करा दिया। अब यह पुलिस के लिए सिर दर्द बन चुका है।
ज्यादातर मामले में शादी का झांसा देकर किशोरियों को साथ ले जाने का मामला सामने आया है। समाजशास्त्री के विचारों के अनुसार काम के अलावा बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उनकी हरकतों पर नजर रखें। अगर वह पथ भ्रमित हो रहे हैं तो काउंसिलिंग कराएं। अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि मामले सामने आने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। केस दर्ज कर जांच-पड़ताल की जाती है।
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केस नंबर एक
24 जून 2023 को निचलौल थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी एक युवक के झांसे में आ गई। फिर किशोरी उसके साथ घर छोड़ कर चली गई। इस मामले में पुलिस ने किशोरी के पिता की तहरीर पर आरोपी युवक पर अपहरण का केस दर्ज कर मामले की जांच-पड़ताल कर रही है।
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केस नंबर दो
12 मार्च 2023 को निचलौल थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी गांव के ही युवक के प्रेम जाल में आ गई। किशोरी ने युवक से शादी करने के लिए घर छोड़ दिया। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन किशोरी का पता नहीं चल सका। फिर परिजनों ने पुलिस को तहरीर देकर किशोरी की तलाश करने की गुहार लगाई। पुलिस ने दो अज्ञात युवकों पर संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच में जुट गई।
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केस नंबर तीन
दो अप्रैल 2023 को निचलौल थाना क्षेत्र के एक गांव की किशोरी शादी के लालच में फंसर घर छोड़कर युवक के साथ चली गई। इस मामले में पुलिस ने परिजन की शिकायत पर युवक समेत चार लोगों पर केस दर्ज कर किशोरी की तलाश कर रही है।
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कोट
कम उम्र में ऐसी हरकतें होना चिंता का विषय है। मां-बाप से हितकर कोई नहीं हो सकता। सबसे पहले यह सोचना चाहिए की झांसा देने वाले भला क्यों हित की बात सोचेंगे। किशोरा अवस्था में बहुत संभल कर चलने की जरूरत है। अपने दिमाग को पढ़ाई की तरफ लगाएं। किताबों में व्यस्त रखें। अनुशासन में रहने के साथ ही अच्छे साहित्य का अध्ययन करें। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की मनोदशा को पढ़ते रहें। जरा भी गड़बड़ लगे तो उन्हें समझाएं। परिवार में बच्चों के साथ वक्त देने की जरूरत है। आधुनिक युग में कामकाज के बोझ के चलते अभिभावक इन बातों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। सामाजिक ताने-बाने को मजबूत बनाने के लिए सभी को आगे कदम बढ़ाने की जरूरत है।
राजन आर्या, प्रवक्ता, समाज शास्त्र, राजेंद्र प्रसाद ताराचंद्र महाविद्यालय, निचलौल
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बेहतर शिक्षा के साथ परिवार में अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है। नासमझी में कदम बहकने पर हमेशा इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। हमारे जीवन के हर एक काम के लिए बेहतर अनुशासन की आवश्यकता होती है। पारिवारिक और सामाजिक जीवन में तो कहीं ज्यादा अनुशासन की आवश्यकता होती है। अनुशासन भी एक प्रकार की विद्या है। अपनी दिनचर्या, रहन-सहन, सोच-विचार और अपने समस्त व्यवहार को व्यवस्थित करना ही अनुशासन है। अनुशासन का गुण बचपन में ही ग्रहण किया जाना चाहिए। विद्यालय की सारी व्यवस्था में अनुशासन और नियमों को लागू करने के पीछे यही बात है।
डॉ. शांति शरण मिश्र, शिक्षाविद