चार दिन पहले ठूठीबारी क्षेत्र में 150 किलोग्राम (हाइब्रिड सुडान) ज्वार बीज बार्डर पर हुआ था बरामद
भारतीय क्षेत्र में ज्वार बीज 40 से 55 रुपये प्रति किलो तो नेपाल में बिक रहा 120 से 125 रुपये प्रति किलो की दर से
महराजगंज। भारतीय क्षेत्र से नेपाल में ज्वार के बीज की तस्करी हो रही है। भारतीय क्षेत्र से सस्ते रेट पर ज्वार के बीज खरीद कर नेपाल में महंगे दाम पर बिक्री की जा रही है। नेपाल में ज्वार के बीज की मांग इन दिनों बढ़ने से तस्कर इसे सरहद पार करने लगे हैं। दोनों देशों में ज्वार बीज के रेट में काफी अंतर होने से तस्कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। भारतीय क्षेत्र में यह 40 से 55 रुपये प्रति किलो तो नेपाल में 120 से 125 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। नेपाल बॉर्डर से जितनी दूर तस्कर माल पहुंचाते हैं रेट उतना ही अधिक मिलता है।
करीब चार दिन पहले ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र में भरवलिया बंधे से होकर भेजा गया नेपाल में 150 किलो ज्वार का बीज बरामद हुआ था। इसके साथ पकड़े गए नेपाली युवक के खिलाफ कस्टम एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। सूत्र बताते हैं कि ज्वार के बीज राजकीय बीज गोदामों से लेकर नेपाल पहुंचाया जा रहा है। हालांकि बरामदगी में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। बीते दिनों पनियरा क्षेत्र में राजकीय बीज गोदाम से मूंगफली का बीज ट्रॉली पर लदा हुआ पाया गया था तो कार्रवाई की गई थी। इधर नेपाल में ज्वार के बीज को तस्कर पहुंचा रहे हैं। भारतीय क्षेत्र से इसे सस्ते रेट पर खरीद लिया जा रहा है। नेपाल में ज्वार की बुआई होती है। गेंहू के सीजन में ही इसकी खेती होती है। बीज के नेपाल में निर्यात पर प्रतिबंधित है। ऐसे में इसकी तस्करी हो रही है। तस्करी के जरिए पहले इसका भंडारण किया जा रहा है। नेपाल में ज्वार के बीज मुंह मांगे दामों बिक जाते हैं।
सूत्र बताते हैं कि बरगदवा, ठूठीबारी, परसामलिक समेत अन्य क्षेत्रों से कैरियर इसे आसानी से लेकर चले जा रहे हैं। वहीं कृषि बीज गोदामों से सेटिंग कर तस्कर बीज आसानी से हासिल कर लेते हैं। बीज लेने के दौरान कायदे कानून का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसमें नियम के मुताबिक जरूरी प्रपत्र जमाकर बीज लिए जाते हैं। ज्यादा लाभ होने पर इसमें सभी का हिस्सा बंट जाता है। इसमें कार्रवाई होने का खतरा भी कम रहता है। बीते दिनों हुई बरामदगी से ज्वार के तस्करी की पोल खुली तो इसके नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। निचलौल कस्टम अधीक्षक ठूठीबारी डीके अस्थाना ने बताया कि नेपाल सरहद पर खाद्य पदार्थों की होने वाली तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। सीमावर्ती इलाकों में पुलिस और एसएसबी के साथ मिलकर छापा मार कार्रवाई भी की जाती है।
ज्वार के कोमल दाने वाले को भूनकर खाया जाता
जिला अस्पताल के डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि ज्वार का बीज मुख्य रूप से पौष्टिक अनाज के रूप में मानव उपभोग (रोटी, दलिया, सूप, बिस्कुट) और पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में काम आता है। यह ग्लूटेन-मुक्त, फाइबर और आयरन से भरपूर होता है, जो वजन घटाने, मधुमेह नियंत्रण, पाचन और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक है। ज्वार के कोमल दाने को भूनकर खाया जाता है। ज्वार की जड़ पित्तविकार और प्यास को खत्म करती है। इसके तने से मिले शक्कर पेट के लिए थोड़ी गरम व रुचिकारक होती है और जलन को खत्म करती है। इससे शरीर को पौष्टिकता मिलती है। इसके पौधे के तने कोमल होते हैं।