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Maharajganj News: खैरा की लकड़ी का कटान कर बरेली भेज रहे तस्कर

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निचलौल। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत शिवपुर वन रेंज के जंगल में कीमती लकड़ी के तस्करों की गतिविधियां इन दिनों काफी बढ़ चुकी हैं। तस्कर सुस्ता बार्डर से सटे वन रेंज के जंगल से खैरा की लकड़ी काट कर नारायणी नदी के रास्ते मोटर बोट से वन क्षेत्र से बाहर निकाल रहे हैं। इसके बाद खैरा की लकड़ी को वाहनों पर लोड कर धंधेबाज बरेली के बाजार में भेज रहे हैं। बीते दिनों नदी और नदी के आस-पास बरामद हुई खैरा की लकड़ी से तस्करी की सच्चाई सामने आ गई है।
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मंगलवार को नारायणी नदी के बंधे से सटे बढ़या गांव के चौराहे स्थित एक दुकान पर बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने नाम न उजागर होने की शर्त पर बताया कि सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतरंग शिवपुर वन रेंज के नेपाल सुस्ता बार्डर से सटे कई किलोमीटर के दायरे में खैरा लकड़ी पाई जाती है। इसे पिछले कुछ महीने से तस्करों की नजर लग चुकी है। तस्कर इन्हीं जगहों से खैरा की लकड़ी का कटान कर रहे हैं। फिर मोटर बोट के जरिए निचलौल और शिवपुर वन रेंज के जंगलों के बीच से होकर गुजरी नारायणी नदी के रास्ते वन क्षेत्र से दूर चिह्नित नदी घाट पर पहुंचाते हैं। जहां पर पहले से मौजूद तस्कर लकड़ी को वाहनों पर लोड कर लकड़ी विक्रेता की फर्जी कागजात लगाकर बरेली भेज दे रहे हैं। तस्करों को इससे मोटा मुनाफा हो रा है। इस धंधे में शामिल कैरियर नदी और जंगलों के रास्ते से अच्छे से परिचित होते हैं। यही कारण है कि धंधे में सहयोग करने वाले कैरियरों को भी तस्कर अच्छी रकम देते हैं। निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने कहा कि सूचना मिलने के बाद जंगलों में वन कर्मियों की गश्त बढ़ा दी गई है। लकड़ी धंधेबाजों के हर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जंगल में अवैध कटान और लकड़ी तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सिसवा बाजार में किराए के मकान में रहता है धंधेबाज: सूत्रों की मानें तो कैरियरों का काम है कि खैरा लकड़ी को जंगल से काट कर नारायणी नदी के किनारे लाकर मोटर बोट पर लोड कर देना। हालांकि धंधे का मुख्य सरगना सिसवा बाजार स्थित एक मोहल्ले में किराया के मकान में रहता है।
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