720 परियोजनाओं को 2020 में मिली थी स्वीकृति, दिसंबर 2025 में किया जाना था पूरा
छह वर्ष बाद तक सिर्फ 162 परियोजनाएं हो सकीं पूरी, महज 131 से की जा रही पेयजल आपूर्ति
महराजगंज। जनपद में हर घर नल परियोजना का बुरा हाल है। 1500 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत 720 परियोजनाएं छह वर्ष बाद भी अधर में अधूरी हैं। आने वाले दिनों में तपिश बढ़ने से पानी की मांग भी बढ़ेगी। ऐसे में परियोजना को लेकर जिम्मेदारों का रवैया लोगों की परेशानी बढ़ाएगा। हालात यह है कि दिसंबर 2025 में इन परियोजनाओं को पूरा किया जाना था लेकिन अभी महज 162 ही पूरी की जा सकी हैं। इनमें से भी मात्र 131 से जलापूर्ति हो रही है।
जिले की 882 ग्राम पंचायतों के लिए 2020 में हर घर जल योजना को जनपद के लिए शासन ने स्वीकृति दी। 1500 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को जल निगम ने कार्यदायी संस्थाओं की सुपुर्दगी में दिया। जिम्मेदारी के रवैये की वजह से छह वर्ष बाद भी 720 में से सिर्फ 162 परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं और 558 परियोजनाएं अभी भी अधर में लटकी हैं। परियोजनाओं को स्वीकृत करते समय दिसंबर 2025 में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। तय समय पर आधा कार्य भी नहीं होने के कारण निर्माण कार्य पूरा करने की अवधि बढ़ाकर दिसम्बर 2028 कर दी गई है।
जिन ग्राम पंचायतों में परियोजना लटकी हुई है वहां के लोग कम गहराई वाले हैंडपंप से प्यास बुझा रहे हैं अथवा आरओ प्लांट से पानी खरीदकर प्यास बुझा रहे हैं। ग्राम पंचायतों की इस पेय जल परियोजना की स्थिति यह है कि किसी ग्राम पंचायत में टैंक बनाकर छोड़ दिया गया है तो कुछ ग्राम पंचायतों में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क खोदकर छोड़ दी गई है।
विभागीय दावा है कि 162 परियोजना पूरी हो चुकी हैं लेकिन हकीकत में सिर्फ 131 परियोजना ही पेयजल आपूर्ति कर रही हैं। सदर ब्लाॅक के सिसवनिया में 2.84 करोड़, लखिमा थरुआ में 2.40 करोड़ रुपये से हर घर नल परियोजना का काम 2023 से प्रभावी है, लेकिन अब तक सिर्फ यहां पानी की टंकी ही स्थापित हो सकी है। यह सिर्फ दो ग्राम पंचायतों की स्थिति नहीं बल्कि पूरे जनपद में 90 ग्राम पंचायतों की स्थिति है जहां सिर्फ वाटर टैंक बनाया गया है।
सदर के ही बरवां विद्यापति में तो बिना टैंक पहले पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क ही खोदकर छोड़ दी गई लेकिन अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाने के बाद भी सड़क दुरुस्त कराने की जरूरत नहीं समझी गई। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ओम प्रकाश पांडेय ने बताया कि सड़क तीन माह तक खोदकर छोड़ी गई थी। बार-बार कहने पर भी सड़क नहीं सही कराई गई तो हारकर खुद ही सड़क दुरुस्त कराया लेकिन इसके एवज में किसी तरह का भुगतान नहीं दिया गया। कई गांवों में नल तो लगाए गए हैं लेकिन या तो पानी नहीं आता या फिर बेहद कम दबाव और संदिग्ध गुणवत्ता का पानी सप्लाई किया जा रहा है।
भिसवां, बेलवा टीकर ग्राम पंचायतों में स्थिति यह है कि कागज में यह गांव हर-घर-नल-जल संतृप्त घोषित कर दिया गया है। जबकि सच्चाई यह है कि ग्राम पंचायत में न तो पानी आ रहा है और न ही सभी घरों में टोटी ही लगी है। लक्ष्मीपुर ब्लॉक में ग्राम पंचायत भगवानपुर में पानी की टंकी का निर्माण 2023-24 में शुरू हुआ। 2.88 करोड़ खर्च के बाद भी 893 घरों को आपूर्ति नहीं मिली। इसी तरह मल्हनी फुलवरिया गांव में भी पानी की टंकी का निर्माण और बाउंड्रीवॉल अपूर्ण है और कार्य ठप पड़ा है। फरेंदा विकास खंड के मथुरा नगर की स्थिति यह है कि यह क्षेत्र आनंदनगर-घुघली रेल रूट के दायरे में पड़ गई। अब रेल परियोजना पूर्ण होने के बाद ही आगे कार्य हो सकेगा।
एक परियोजना के तहत यह होना था काम
प्रत्येक हर घर जल परियोजना के तहत वाटर टैंक, पंपमोटर व लोगों के घर तक अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाते हुए आच्छादित क्षेत्र के 75 फीसदी घरों में टोटी लगाई जानी थी। जिससे प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। प्रत्येक परियोजना की लागत दो करोड़ रुपये से अधिक है।
तपिश बढ़ने पर बढ़ेगी परेशानी
आंचलिक मौसम विभाग ने अलर्ट कर रखा है कि इस बार तपिश खूब पसीना छुड़ाएगी। ऐसी परिस्थितियों में पानी ही राहत का माध्यम बनेगा, ऐसे में शुद्ध पेयजल की अनुपलब्धता परेशानी का कारण बनेगी अथवा दूषित जल पीकर लोग बीमार होंगे। जनपद के सभी ग्राम पंचायतों में छह वर्ष पहले जब हर घर जल परियोजना मंजूर हुई तब लगा कि आने वाले समय में शुद्ध पेयजल के इंतजाम से लोगों को खरीदकर पानी नहीं पीना पड़ेगा, लेकिन हालात पहले जैसे ही बने हैं। विभागीय लचरता ने उम्मीदों को धराशायी कर दिया है।
वर्जन
मथुरानगर में बनने वाली टंकी का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। टंकी निर्माण की जानकारी मिलने पर काफी खुशी हुई थी। अब पता चल रहा है कि यह जमीन रेल परियोजना के हिस्से में चली गई है। इससे शुद्ध पानी मिलने की आस टूट गई है।
-राजेश मौर्या, मथुरानगर
सिंदुरिया में वर्ष 2015 में जब इस टंकी का निर्माण हुआ तो सभी ग्रामीण बहुत खुश थे। बाद में लगा की खुशी पर ग्रहण लग गया। सिंदुरिया ग्राम सभा की आबादी लगभग 15 हजार है, यहां पांच टोले हैं। इसमें भगवानपुर, सड़क टोला, मुरलीबारी, मंगलापुर और सिंदुरिया खास पानी की व्यवस्था ऐसी है कि सिंदुरिया गांव की आधी आबादी में ही पानी सप्लाई नहीं हो पा रही है।
-प्रेम शंकर गुप्ता, पूर्व प्रधान
जनपद की कुल 162 परियोजना पूरी हो चुकी हैं। 90 गांव में टैंक निर्माण पूरा कराकर पाइपलाइन बिछाई जा रही है। अन्य ग्राम पंचायतों में भी कार्य प्रभावी है। कार्य पूर्ण होने के बाद अगले चरण का बजट जारी होता जिसके कारण कार्य समय से नहीं पूरा हो सका। समस्या को देखते हुए शासन ने परियोजना पूर्ण करने की अवधि दिसंबर 2028 तक कर दिया गया है।
-आतिफ हुसैन, अधिशासी अभियंता, जल निगम