- विभाग का कहना बार-बार ई-केवाईसी व अन्य कमियों को दूर कराने के बाद भी नहीं दिख रहा सुधार
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में 3 लाख 51 हजार किसानों को किसान सम्मान निधि के चौदहवीं किस्त का लाभ दिया गया है। लेकिन, ई-केवाईसी के अपडेट न होने व अन्य कमियों की वजह से अभी एक लाख 33 हजार किसानों को निधि के लाभ से वंचित रहना पड़ा है। विभागीय अधिकारियों को कहना है कि ई-केवाईसी व अन्य कमियों को दूर कराने के लिए किसानों को बार-बार कहा गया मगर किसानों की ओर से इसमें कोई विशेष रूचि नहीं दिखाई गई। वहीं किसानों का कहना है सुधार के लिए कागज देने के बाद भी अब तक उन्हें योजना का लाभ प्राप्त नहीं हो सका है।
जिले में किसान सम्मान निधि के प्रथम किस्त का लाभ कुल चार लाख 84 हजार 678 किसानों को मिला था। इसमें सदर तहसील के 2,10,871 किसान, नौतनवां तहसील के 87,307, निचलौल तहसील के 96,561 किसान व फरेंदा तहसील के 89,939 किसान हैं। प्रारंभिक किस्तों की तुलना में अब लाभार्थियों की संख्या में निरंतर कमी आ रही है। कारण कि अभिलेखों में समस्या के कारण वे लाभ से वंचित हो रहे हैं। किसी का ई-केवाईसी नहीं हुआ है तो किसी का नाम व खाता संख्या आदि में गड़बड़ी की स्थिति है। कृषि विभाग का कहना है कि कमियों को दूर कराने के लिए बार-बार किसानों से अपील भी की गई, मगर उसका बहुत लाभ दिखा नहीं। अब जबकि चौदहवीं किस्त की धनराशि भेजी गई है तो एक बार फिर कृषि कार्यालय पर किसानों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है। वे मांगे गए अभिलेख को दे रहे हैं, फिर भी उनकी समस्या दूर नहीं हो रही है।
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क्या कहते हैं किसान
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की उन्हें 11 किस्त की धनराशि प्राप्त हुई है। इसके बाद से एक भी किस्त नहीं मिली। विभाग की ओर से मांग के क्रम में कागजात दिए गए लेकिन समस्या जस की तस बरकरार है।
प्रहलाद, रेहरा
किसान सम्मान निधि के लाभ के लिए दो वर्ष पूर्व से आवेदन किया हूंं। अभी तक उसका लाभ प्राप्त नहीं हुआ है। विभाग में पता लगाने पर वहां से जल्द लाभ मिलने का आश्वासन दिया जाता है, मगर लाभ मिलता नहीं है।
रामप्रीत, बैरवा बनकटवा
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ई-केवाईसी व अन्य समस्याओं के निदान के लिए किसानों से कई बार तहसील व कार्यालय में आकर कागजात देने को कहा गया। जिन किसानों ने दिया है उनकी समस्याओं का निराकरण कराया जा रहा है। जिनकी समस्या दूर नहीं हुई है वे उनसे मिलकर अपनी समस्याओं का निदान करा सकते हैं।
रामशिष्ट, उप कृषि निदेशक