2.95 लाख रुपये का केसीसी ऋण होने के कारण बैंक के पक्ष में बंधक है जमीन
नौतनवा। तहसील क्षेत्र की ग्राम सभा सिसहनिया उर्फ शीशमहल स्थित करीब दो एकड़ जमीन का बंधक होने के दौरान ही बैंक का फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैनामा और नामांतरण आदेश तक चढ़वा लेने का मामला सामने आया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। मंगलवार को यह फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद से ही अधिकारियों में हड़कंप का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा सिसहनिया उर्फ शीशमहल में स्थित करीब दो एकड़ जमीन पर उसके दो स्वामियों ने 2.95 लाख रुपये का केसीसी ऋण लिया है। उक्त जमीन बैंक के पक्ष में बंधक है। बंधक जमीन के नामांतरण आदेश पर शासन स्तर से ही रोक है। इस बीच करीब दो माह पूर्व भू-स्वामियों ने कथित तौर पर संबंधित बैंक से जारी भार मुक्ति का अनापत्ति प्रमाण पत्र लगाकर लगभग दो एकड़ से अधिक जमीन का क्षेत्र की ही निवासी एक महिला के पक्ष में बैनामा कर दिया। 27 जून को नायब तहसीलदार न्यायालय से जमीन का खारिज-दाखिल प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद नामांतरण आदेश तक हो गया।
इस दौरान अधिवक्ताओं के बीच उक्त जमीन के बंधक होने की सुगबुगाहट और विरोध के सुर तेज हुए तो इसकी भनक अधिकारियों को लगी। मंगलवार को जब अधिकारियों ने संबंधित बैंक से एनओसी जारी होने के संबंध में पूछताछ किया तो बैंक ने उक्त जारी पत्र को फर्जी करार देते हुए तहसीलदार एवं उपनिबंधक नौतनवा के नाम से एक पत्र जारी कर इसकी लिखित जानकारी भी दी। इतना ही नहीं उक्त जमीन के संबंध में नामांतरण आदेश होने से पहले नायब तहसीलदार न्यायालय में अधिवक्ताओं द्वारा लगाए गए वकालतनामा और आपत्ति पत्र को भी फाइल से गायब कर देने की बात सामने आ रही है। वहीं न्यायालय की पत्रावलियों में छेड़छाड़ और बैंक का फर्जी दस्तावेज तैयार कर नामांतरण आदेश चढ़वाने के मामले की जांच अब शुरू हो गई है।
वर्जन
फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र के जरिए जमीन का नामांतरण आदेश चढ़वाने का मामला सामने आया है। बंधक जमीन के नामांतरण आदेश पर शासन स्तर से ही रोक का फरमान है। पूरे मामले की जांच-पड़ताल कराई जा रही है। सत्यता के आधार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-नवीन प्रसाद, एसडीएम