महराजगंज। अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों के परिजनों को अब उनका जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए भागदौड़ नहीं करना पड़ेगा। अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को ‘मां नवजात ट्रैकिंग सिस्टम एप’ (मंत्रा) के जरिए तत्काल जन्म प्रमाणपत्र मिल जाएगा।
इसके लिए एप को सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं का रिकार्ड तुरंत दर्ज किया जा रहा है। इससे प्रमाणपत्र तत्काल जारी किया जा सके।
जानकारी के अनुसार, पहले सरकारी अस्पतालों में नवजात शिशुओं के जन्म के बाद उनके परिवार के लाेगों को जन्म प्रमाणपत्र के लिए बहुत ज्यादा परेशान होना पड़ता था। इससे उनकी समय की बर्बादी के साथ अधिक पैसे भी खर्च होते थे, लेकिन अब शासन के निर्देश पर नई व्यवस्था की शुरुआत की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इस नई व्यवस्था के तहत जन्म पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाना है। पहले जहां परिजनों को नवजात का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन करना पड़ता था और कई बार दस्तावेजों की कमी से प्रमाण मिलने में देरी होती थी। वहीं अब यह काम अस्पतालों में ही हो रहा है।
शिशु और मां की स्वास्थ्य ट्रैकिंग में भी मददगार साबित होगी : मंत्रा एप के जरिए जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में संस्थागत प्रसव के बाद नवजात शिशु की पूरी जानकारी जन्म का समय, माता पिता का नाम, शिशु का लिंग, वजन आदि विवरण दर्ज की जाती है।
इसकी जानकारी सीधे सीआरएस पाेर्टल पर भेज दी जाती है। इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों और निकायों में जन्म प्रमाणपत्र जनरेट कर दिया जाता है। इससे अस्पताल में डिस्चार्ज के बाद परिजनों को जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध हो जाती है।