सख्त नियमों में उलझी रजिस्ट्री, ओटीपी ने बढ़ाई परेशानी
अंगूठा लगाने में भी दुश्वारियां, लग रहा अधिक समय, पहले दिन 30 कम हुई रजिस्ट्री
महराजगंज। जमीनों की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़े पर नकेल कसने की व्यवस्था और सख्त हो गई है। नई व्यवस्था के तहत पहले दिन ओटीपी नहीं आने से जमीन बैनामा कराने में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। कुछ लोगों के मोबाइल पर ओटीपी आई तो कुछ पर नहीं आई। काफी देर तक लोगों को परेशान होना पड़ा। अंगूठा लगाने में भी देरी हुई। औसतन एक दिन में 50 रजिस्ट्री होती हैं लेकिन सोमवार को महज 19 रजिस्ट्री हुईं।
सोमवार सुबह करीब 11 बजे से ही सदर उप निबंधक कार्यालय में बैनामा कराने वालों की भीड़ जुटने लगी। धनखरी गांव की प्रिया जमीन बैनामा कराने के लिए सदर उप निबंधक कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने बताया कि दस्तावेजों की ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान क्रेता और गवाहों के मोबाइल फोन पर ओटीपी आ गया लेकिन उनके मोबाइल नंबर पर ओटीपी नहीं आया। काफी देर तक इंतजार करने और दोबारा प्रयास कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका। अंततः उन्हें बिना रजिस्ट्री कराए लौटना पड़ा।
इसी तरह बैदा निवासी मनोज भी नई व्यवस्था से परेशान दिखे। उन्होंने बताया कि वह सदर रजिस्ट्री कार्यालय में दो डिसमिल जमीन खरीदने के लिए पहुंचे थे। कंप्यूटर कक्ष में दस्तावेजों की ऑनलाइन प्रक्रिया कराई गई। उनके मोबाइल पर ओटीपी आ गया लेकिन विक्रेता और गवाहों के मोबाइल फोन पर ओटीपी नहीं आया। इसके चलते पूरी प्रक्रिया वहीं अटक गई और रजिस्ट्री नहीं हो सकी।
रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर बातचीत करती हुई मंसूरगंज निवासी जानकी ने बताया कि वह जमीन बिक्री के लिए उप निबंधक कार्यालय गई थीं। सभी जरूरी दस्तावेज लेकर कंप्यूटर कक्ष में ऑनलाइन प्रक्रिया कराई गई। उनके मोबाइल फोन पर ओटीपी प्राप्त हो गया लेकिन क्रेता और गवाहों के मोबाइल फोन पर ओटीपी नहीं आया। घंटों इंतजार के बाद भी जब समस्या हल नहीं हुई तो रजिस्ट्री नहीं हो सकी।
इसी तरह बिरैचा निवासी कमलेश्वर अपने एक करीबी की रजिस्ट्री में गवाह के रूप में पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद क्रेता और विक्रेता के मोबाइल फोन पर ओटीपी आ गया लेकिन उनके मोबाइल फोन पर ओटीपी नहीं आया। गवाह का ओटीपी अनिवार्य होने के कारण रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधूरी रह गई। वहीं, कुछ मामलों में ओटीपी की समस्या नहीं आई लेकिन बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा सत्यापित न होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोगों का अंगूठा मशीन पर समय से नहीं लग सका। मशीन बार-बार अस्वीकार कर रही थी। हालांकि कुछ मामलों में दूसरे अंगूठे से बायोमेट्रिक सत्यापन किया गया। लेकिन इस अतिरिक्त प्रक्रिया के कारण एक-एक रजिस्ट्री में सामान्य से कहीं अधिक समय लग गया।
इसके अलावा फरेंदा रजिस्ट्री कार्यालय में भी नई व्यवस्था का असर देखने को मिला। रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर फूलमनहां निवासी सुधा मिलीं। उन्होंने बताया कि वह जमीन खरीदने के लिए फरेंदा रजिस्ट्री कार्यालय आई थीं। ऑनलाइन आवेदन के दौरान विक्रेता और गवाहों के मोबाइल फोन पर ओटीपी प्राप्त हो गया लेकिन उनके मोबाइल नंबर पर ओटीपी नहीं आया। कई बार प्रयास कराने के बाद भी समस्या दूर नहीं हुई और रजिस्ट्री नहीं हो सकी। सिधवारी निवासी कुमारी ने बताया कि वह जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए कार्यालय गई थीं। भूमि से जुड़े दस्तावेजों की ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान उनके और विक्रेता के मोबाइल फोन पर ओटीपी आ गया, लेकिन गवाह के मोबाइल पर ओटीपी नहीं आया। इस कारण पूरी प्रक्रिया रोकनी पड़ी।
फर्जीवाड़े, कूटरचित दस्तावेज और बेनामी लेन-देन पर रोक
दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता सुधांशु पाण्डेय ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत ओटीपी और बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य किया गया है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तविक क्रेता, विक्रेता और गवाह ही रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल हों। इसका मकसद जमीनों की रजिस्ट्री में होने वाले फर्जीवाड़े, कूटरचित दस्तावेज और बेनामी लेन-देन पर पूरी तरह से लगाम लगाना है। फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने आधार डाटा से सत्यापन कराना अनिवार्य कर दिया है। अब रजिस्ट्रार कार्यालयों में बॉयोमीट्रिक मशीन से क्रेता-विक्रेता के अंगूठे व अंगुलियों के निशान का आधार कार्ड के डाटा से मिलान हो रहा है। नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रार कार्यालयों में रजिस्ट्री का सॉफ्टवेयर डिजिटल रूप से आधार से लिंकअप किया गया है।
अब तक सिर्फ पहचान पत्र देखकर होती थी रजिस्ट्री
अब तक सिर्फ पक्षकारों के पहचान पत्र देखकर संपत्ति की रजिस्ट्री की जाती थी। पहचान पत्र वास्तविक है या फर्जी, इसके सत्यापन की व्यवस्था निबंधन विभाग के पास नहीं थी। अगर बाद में पहचान पत्र फर्जी निकला तो विवाद उत्पन्न होता था और मामला न्यायालय तक जाता था। इससे मुकदमों की संख्या भी तेजी से बढ़ती थी। आधार सत्यापन के लिए बायोमीट्रिक व्यवस्था होने से इस सब से छुटकारा मिलने की उम्मीद है।
रजिस्ट्री की संख्या औसत से कम दर्ज
महराजगंज जिले में रजिस्ट्री की संख्या औसत से कम दर्ज की गई। सदर तहसील में जहां सामान्य तौर पर 50 से 60 रजिस्ट्री होती हैं, वहां सिर्फ 40 रजिस्ट्री ही हो सकीं। फरेंदा तहसील में औसतन 40–50 की तुलना में मात्र 14 रजिस्ट्री दर्ज की गई। इसी तरह नौतनवा में औसतन 35–40 के मुकाबले 29 रजिस्ट्री हुई। जबकि निचलौल तहसील में औसतन 30–40 की जगह केवल 20 रजिस्ट्री हो सकी।
नई व्यवस्था से यह फायदा
- कोई विक्रेता एक ही जमीन को दो बार नहीं बेच सकेगा।
- आधार डाटा से रजिस्ट्री के लिंकअप होने से जब चाहे आधार कार्ड के डाटा से जमीन की जानकारी की जा सकेगी।
- बेनामी जमीनों की बिक्री भी रुक जाएगी।
वर्जन
शासन की ओर से रजिस्ट्री कराने में बायोमेट्रिक अनिवार्य कर दी गई है। यह बदलाव एक फरवरी से जिले के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में प्रभावी हो गया है। इसके लिए पहले से भी सारी तैयारियां कर ली गईं हैं।
-कमलेश चंद्र वर्मा, उप निबंधक, सदर
आधार कार्ड में नाम, पता, मोबाइल नंबर और बायोमीट्रिक विवरण अपडेट करा लें ताकि रजिस्ट्री के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके आधार पर फिंगरप्रिंट या आंखों की स्कैनिंग में दिक्कत आती है। नई व्यवस्था लागू हो चुकी है।
-आलोक शुक्ला, एआईजी स्टांप