शासन के संस्कृति अनुभाग का डीएम को पत्र
प्रधानमंत्री संग्रहालय से पांडुलिपि उपलब्धता का आमंत्रण
महराजगंज। राष्ट्रीय स्तर पर प्रारंभ हुए वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण पांडुलिपि संरक्षण की कवायद से जनपद को जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री संग्रहालय की इस पहल के परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार के संस्कृति अनुभाग ने महराजगंज डीएम को पत्र भेजा है।
रामायण पांडुलिपि संरक्षण से जुड़कर जनपद के गौरव में न सिर्फ इजाफा होगा बल्कि अगर प्राचीन पांडुलिपि मिलती है तो जनपद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति हासिल करेगा। डीएम ने बताया कि पत्र में उल्लेख है कि जनपद में कहीं भी अगर रामायण से जुड़ी पांडुलिपि है तो उसे अयोध्या में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय पहुंचाया जाए। इसे लेकर शीघ्र ही जनपद स्तरीय अधिकारियों से मंत्रणा कर मुहिम शुरू किया जाएगा।
देश में सुरक्षित प्राचीन रामायण की पांडुलिपियों को एक स्थान पर संजोने की बड़ी पहल शुरू की गई है। प्रधानमंत्री संग्रहालय की ओर से फरवरी 2026 में शुरू इस पहल से रामायण पांडुलिपियों का राष्ट्रीय भंडार स्थापित होना है। ऐसे में जिन विद्वानों, संस्थानों या जनपदों में दुर्लभ रामायण पांडुलिपि सुरक्षित है। उनसे संपर्क साधकर सहयोग लेने की कवायद शुरू की गई है। ताकि इस धरोहर का दस्तावेजीकरण (डिजिटलीकरण) और संरक्षण किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, 19 मार्च को अयोध्या पहुंच रहीं राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय को लेकर कुछ विशेष घोषणा कर सकती हैं। जिससे अयोध्या रामायण परंपरा के वैश्विक अध्ययन का केंद्र बनकर भी उभर सकता है।
पांडुलिपि जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित
राष्ट्रीय भंडार में संरक्षण से पहले प्राप्त पांडुलिपि जांच के लिए संस्कृति अनुभाग कमेटी को भेजी जाएगी। इसके लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित है। जिसमें केंद्रीय सांस्कृतिक विश्वविद्यालय के कुलपति, राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के प्रबंधक, पांडुलिपि के जानकार दो प्रोफेसर शामिल रहेंगे। राज्य संस्कृति अनुभाग से जारी पत्र के मुताबिक, संस्कृत सहित अन्य भारतीय लिपियों जैसे ब्राह्मी, देवनागरी, बंगाली, ओड़िया, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, तमिल, गुजराती की लिपि में लिखित पांडुलिपि भी शामिल हैं। ताड़पत्र या कागज पर लिखी सचित्र पांडुलिपियां भी तलाशी की जानी है।
सांख्य दर्शन से जुड़ता है जनपद का महत्व
जवाहर लाल नेहरू स्मारक पीजी काॅलेज के प्राचार्य प्रो. अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि वन्य क्षेत्र की बाहुल्यता वाला महराजगंज जनपद कभी कपिल मुनि के सांख्दर्शन के लिए तो कभी कुश के राज्य का भाग बनकर प्रसिद्ध हुआ। बौद्ध धर्म भी नेपाल की तराई से ही निकलकर देश विदेश पहुंचा। संभवतः इन्हीं विशेषताओं को देखकर जनपद को पांडुलिपि संरक्षण पहल से जुड़ने का मौका मिला है।
जनपद के सहायक संस्कृति व पर्यटन अधिकारी प्रभाकर मणि ने बताया कि जिला स्तर आए पत्र में पांडुलिपि भेजने का प्रोफार्मा संलग्न है। इसमें पांडुलिपि शीर्षक, अनुमानित आयु, लिपि, कागज या ताड़पत्र संरचना, किस स्थान से मिलीं इसका उल्लेख करना होगा।
वर्जन
तीन फरवरी को प्रदेश संस्कृति अनुभाग के मुख्य सचिव एसपी गोयल का निर्देश पत्र ज्ञान भारतम् मिशन के परिप्रेक्ष्य में मिला है। इसका उद्देश्य रामायण पांडुलिपि संरक्षण से है। शीघ्र जनपद के उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर अलग-अलग दायित्व तय किए जाएंगे। इससे अगर जनपद में इस तरह की पांडुलिपि है तो उसके संरक्षण की व्यवस्था प्रभावी की जाएगी।
-संतोष कुमार शर्मा, जिलाधिकारी, महराजगंज