लक्ष्मीपुर पूर्वोत्तर रेलवे की पुलिस के साथ पहुंचे इन्जीनियर अमित सिंह
स्थानीय स्तर पर म्यूजियम बनाकर ट्राम्ब वे रेल के इंजन संरक्षित करने की मांग कर रहे हैं ग्रामीण
लक्ष्मीपुर। लक्ष्मीपुर के एकमा डिपो में चार दशक पहले बंद पड़ी देश की पहली ट्रॉम वे रेल परियोजना के इंजन को मंगलवार को लखनऊ ले जाने के लिए पहुंचे रेल अधिकारियों को ग्रामीणों का काफी विरोध का सामना करना पड़ा। रेल अधिकारियों के आने की सूचना पर बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने इंजन को ले जाने से रोक दिया। ग्रामीणों की मांग है कि इस धरोहर को इसी स्थल पर म्यूजियम बना कर संरक्षित किया जाए।
जानकारी के मुताबिक, महराजगंज के सोहगीबरवा जंगल की बहुमूल्य वनसंपदा को दुर्गम वनक्षेत्र से मुख्य रेल लाइन तक लाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1924 में लक्ष्मीपुर रेलवे स्टेशन के निकट भारत की पहली ट्राम्बे वे रेल परियोजना स्थापित की गई थी। तब 3,51,243 रुपये खर्च करके लक्ष्मीपुर रेंज और उत्तरी चौक रेंज के जंगल में 22.4 किमी तक रेल लाइन बिछाई गई थी। निरंतर 55 वर्षो की सेवा कर के 8 लाख घाटे के बाद 1982 में भारत की पहली ट्रॉम वे रेल परियोजना को बंद करना पड़ा। इसमें शामिल प्रत्येक 40 अश्व शक्ति के 4 इंजन, 26 बोगियां व सैलून, 2 निरीक्षण ट्राली सहित तमाम उपकरणों को एकमा डिपो में सुरक्षित रख दिया गया था।
विगत 15 अक्तूबर 2008 को तत्कालीन वनमंत्री फतेहबहादुर सिंह ने इसे ऐतिहासिक धरोहर में शामिल करते हुए संरक्षित करने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में वन विभाग ने ट्रॉम वे रेल परियोजना को म्यूजियम बनाने के लिए एक प्रस्ताव शासन को भेजा था। लेकिन प्रस्ताव पर सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की। वर्ष 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार के निर्देश पर एक इंजन, एक सैलून एवं एक बोगी को लखनऊ चिड़ियाघर में रखवा दिया गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने काफी विरोध भी किया था। स्थानीय लोगों की मांग पर शेष इंजन, बोगी, सैलून आदि को 2016 में बाडर डवलपमेंट योजना के तहत एकमा डिपो में संरक्षित कर गोदाम में रख दिया गया।
चार माह से चल रही लखनऊ पूर्वोत्तर रेलवे की तैयारी
यहां पड़े अवशेष ट्रॉम वे लौह सम्पदा के इंजन को लखनऊ ले जाने के लिए शासन स्तर से प्रयास किया जा रहा है। 17 फरवरी को रेल व वन अधिकारियों की टीम एकमा में पहुंची और शेष इंजन को ले जाने के लिए वाहन लगाए। यह खबर लक्ष्मीपुर के ग्रामीणों को जैसे ही मिली सैकड़ों की संख्या में कस्बे वासी पहुंचे और ट्रॉम वे धरोहर को ले जाने से रोक दिया। उन्होंने मांग किया कि ब्रिटिश साम्राज्य के इस धरोहर को इसी स्थल पर ही म्यूजियम बना कर रखा जाए।अधिकारियों पूरे मामले की जानकारी जिला प्रशासन व रेल प्रशासन को दिया। फिलहाल अभी मौके पर अधिकारी जमे हुए हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ के इन्जीनियर अरविद सिंह और पूर्वोत्तर रेलवे के टेक्नीशियन अजेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर वे लोग एकमा डिपो ट्रॉम वे रेल इंजन को ले जाने के लिए आए हैं। शासन की मंशा के अनुसार रेल प्रशासन इस धरोहर को संरक्षित करेगा। लेकिन ग्रामीणों के विरोध के बाद हम लोगों ने अपने वाहन हटा लिए हैं। पूरे प्रकरण को उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। उप प्रभागीय वनाधिकारी लक्ष्मीपुर एसके सिंह ने बताया कि शासन का निर्देश है कि यहां जंग खा रहे ट्रॉम वे इंजन को धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाए। इसी कारण इसे ले जाने लिए लखनऊ से रेल अधिकारी आए हैं।