महराजगंज। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग में तेंदुओं की सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न खड़ा हो रहा है, क्योंकि बीते दिनों 15 दिनों के अंदर दो तेंदुओं की मौत किसी को भी समझ में नहीं आ रहा है।
दोनों की मौत की वजह बीमारी बताई जा रही है। वन क्षेत्र के अंदर वन्य जीवों के लिए भोजन समेत अन्य जरूरतों की पूर्ति के लिए संसाधन कितने हैं इस पर जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं।
सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग बिहार और नेपाल सीमा से लगा हुआ है। वन क्षेत्र में वन्य-जीवों की सुरक्षा के नाम पर गंभीरता नहीं बरती जा रही है। इनकी सुरक्षा और संरक्षण के नाम पर महज कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। इसकी हकीकत बीते 15 दिनों के अंदर जंगल में दो तेंदुए का शव मिलने के बाद सामने आई है। मौत को जिम्मेदार भले ही बीमारी बता रहे हों, लेकिन इससे साफ है कि जिम्मेदारों की लापरवाही से वन्य जीवों को खतरा बना हुआ है।
इतना ही नहीं वन विभाग के जिम्मेदार बीमारी बताने के अलावा कुछ भी खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं। वहीं वन्य जीवों और जंगल की सुरक्षा को लेकर सजग रहने वाले लोगों ने नाम ने उजागर करने की शर्त पर बताया कि तेंदुए की मौत कोई छोटी बात नहीं है। बल्कि यह गंभीर विषय है कि जंगल में आखिरकार उनकी मौत कैसे और किन परिस्थितियों में हुई है। इसकी गहनता से जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए। अहम सवाल यह भी है कि आखिरकार तेंदुए का शव कई दिनों तक जंगल में पड़ा भी रहा तो उस पर वन विभाग के सुरक्षा प्रहरी की नजर क्यों नहीं पड़ी? वन्य सेंचुरी एरिया में तेंदुए की मौत का होना कोई मामूली बात नहीं है। वन और वन्यजीव संरक्षण को लेकर कार्य करने वाले कार्यकर्ता इससे जरा भी सहमत नहीं हैं कि लगातार बीमारी से तेंदुए की मौत हो रही है।
सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग नेपाल के चितवन और बिहार राज्य के सरहद से लगा हुआ है।
इसके नाते यहां पर वन्य जीवों की चहलकदमी होती रहती है। जंगलों में लगने वाली आग, शिकारियों और वन माफियाओं से वन्य जीवों को खतरा बना रहता है।