पति की शहादत पर गर्व, यादों के सहारे कट रही जिंदगी
शहीद की प्रतिमा के समक्ष जब पत्नी की आंखें नम हुईं तो लोग भी गमगीन हो उठे
संजय कुमार पांडेय
महराजगंज। शहीद पंकज त्रिपाठी की दूसरी बरसी पर हरपुर बेलहिया गांव में स्थित उनकी प्रतिमा के समक्ष शहीद की पत्नी रोहिणी त्रिपाठी भी घरवालों के साथ पहुंची। यहां पहुंचते ही वह फफक पड़ीं। नम आंखों से कुछ देर एकटक पति की प्रतिमा को देखतीं रहीं। फिर प्रतिमा के समक्ष सिर झुकाकर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी और पति को नमन किया। अपने आप को संभलते हुए खड़ी र्हुइं और सैल्यूट कर घर में चली र्गइं। यह देख वहां मौजूद लोगाें की आंखें भी नम हो गईं।
शहीद पंकज त्रिपाठी की पत्नी रोहिणी त्रिपाठी ने कहा कि पति की शहादत पर गर्व है। अब तो उनकी यादों के सहारे जिंदगी कट रही है। दुश्मनों को परास्त कर अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद पति के सपनों को साकार करने में जुटी हूं। नौकरी के साथ दोनो बच्चों का पालन-पोषण कर रही हूं। बच्चों को देखकर वक्त गुजर जाता है। मेरे लिए रुपये पैसे सब बेकार हैं। अब तो यही सपना है कि बेटी वान्या और बेटे प्रतीक को पढ़ा लिखाकर कामयाब बनाऊं।
सरकार ने पति की शहादत पर जितने भी वादे किए थे। सब को पूरा कर दिया। मुझे तो नौकरी मिली है। मन में बस एक टीस है, देवर को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। बेटे को भी बहादुर बनाऊंगी। बेटे को भी सेना में भेजने की कोशिश करूंगी। इन बातों की चर्चा करते हुए अचानक वह खामोश हो र्गइं और आंखों में आंसू भर आए। अंत में बस यही कहा... पीड़ा बयां करने के लिए उनके पास शब्द नहीं हैं। मुुझे गर्व है कि मैं एक शहीद की पत्नी हूं। संवाद
----------------
बेटे को याद करते हुए मां भी चल बसी
शहीद पंकज त्रिपाठी की याद में मां सुशीला देवी का निधन 18 जुलाई 2020 को हो गया। दूसरी बरसी पर घर आए रिश्तेदार आपस में यही चर्चा कर रहे थे। वह जब तक जिंदा रहीं, तब तक शहीद पंकज की एक एक बातों को सभी से कहती रहतीं थीं।