मुहर्रम की आठवीं जुलूस निकाल कर इमामे हुसैन को याद किया गया। सिन्दुरिया,परसा चक गोबरही, परसामीर, मिठौरा, पतरेंगवा, में आठवीं का जुलुस निकाल कर शहीदे कर्बला वालो को याद किया गया।
इस अवसर पर मदरसो में कुरान पढ़ा गया। फातिहा खानी हुई। महफिले मिलाद का आयोजन हुआ। सिन्दुरिया में शहीदे आजम कांफ्रेस का आयोजन हुआ। इसमें कुशीनगर से आये मौलाना नूर आलम ने
कहा कि हुसैन ने अपनी शहादत केवल इस्लाम धर्म बचाने के लिए और सत्य और असत्य की लड़ाई में अपने खानदान के 72 लोगों के साथ कर्बला में आये और अपनी आंखों के सामने एक-एक सबकी लाशें
गिरती देंखी लेकिन सत्य से कभी बिचलित नहीं हुए।
यही कारण है कि हुसैन शहीद होकर भी आज मुसलमानों के दिलों में जिन्दा है। मुहर्रम की सातवीं, आठवीं,नौवीं,और दसवीं का जुलूस निकाल कर शहादत के दिनाें को याद करता है।उनके नाम पर मुसलमान रोजा रखते है।र्कुआन खानी,फातिहा खानी,होती है।लोग मिन्नत मानकर ताजिया बनाते है।
मौलाना मोहम्मद हुसैन ने कहा कि हुसैन अपनी शहादत देकर दुनिया को दिखाना चाहते थे कि कभी भी जीत असत्य की नहीं हो सकती इस लिए ऐ दुनिया के लोगों तुम कभी भी तुम असत्य के लिए अपना नाम बदनाम नही करना इसके लिए चाहे अपनी जान क्यों न देनी पडे़।