महराजगंज। गेहूं बोआई शुरू होते ही उर्वरक के लिए किसानों की मारामारी शुरू हो गई है। विभिन्न जनपदों में जहां खाद की किल्लत बताई जा रही है, वहीं, जिले में भरपूर खाद उपलब्धता के बाद भी किसानों को प्राप्त करने में परेशानी हो रही है। साधन सहकारी समितियों पर लाइन लगाने के बाद भी किसानों को बिना खाद के निराश लौटाया जा रहा है। विभाग और प्रशासन के लगातार प्रयास से भी स्थिति नहीं बदल रही है।
जिले में इस बार गेहूं का रकबा 1.45 लाख हेक्टेयर कृषि विभाग की ओर से निर्धारित किया गया है। कुछ स्थान पर जहां बुआई कार्य जहां पूर्ण कर लिया गया है। वहीं, बड़ी संख्या में किसान उर्वरक न मिलने के चलते बुआई कार्य में पिछड़ रहे हैं। हर रोज बड़ी संख्या में किसान समितियों पर लाइन लगा रहे हैं, लेकिन कुछ को खाद देकर बाकी को लौटा दिया जा रहा है। इसके कारण किसानों का सब्र भी किसी किसी केंद्र पर जवाब दे जा रहा और वह प्रदर्शन इत्यादि करने को भी मजबूर हो रहे हैं।
सहकारिता विभाग में उर्वरक उपलब्धता की बात करें तो 96 सहकारी समितियों पर मौजूदा समय में 2700 एमटी डीएपी, एनपीके व यूरिया जहां वितरण के लिए उपलब्ध है। वहीं विभाग के पास 700 एमटी डीएपी, 160 एमटी एनपीके व 5614 एमटी यूरिया का स्टाॅक अवशेष है। साथ ही विभाग को 22 व 23 नवंबर को 319 एमटी व 322 एमटी डीएपी की खेप प्राप्त हो जाएगी। खाद उपलब्धता के आंकड़े तो यही बता रहे कि समितियों पर खाद की उपलब्धता काफी बेहतर है। फिर किसानों को दिक्कत क्यों है और समिति से उनको खाद नहीं मिलने का कारण क्या है।
इस गहराई में अगर उतरें तो इसके लिए समितियों के लिए तय नियम ही जिम्मेदार दिखता है। सहकारिता की समितियों को डिमांड का सिर्फ 35-40 फीसदी उर्वरक ही वितरित करना है। बाकी 60 फीसदी उर्वरक किसानों को उन दुकानों से खरीदना है, जिन्हें कृषि विभाग ने बिक्री का लाइसेंस दे रखा है।