882 गांवों में फागिंग के लिए महज नौ किलो ही केमिकल
दूसरे जिलों से उपकरण मंगा कर नापा जा रहा मच्छरों का घनत्व
महराजगंज। जिले में मलेरिया के मामले मिलने लगे हैं और डेंगू का सीजन शुरू हो चुका है। लेकिन मलेरिया विभाग खुद ही बीमार नजर आ रहा है। मच्छरों का घनत्व नापने के लिए जरूरी उपकरण दूसरे जिले से मंगाए गए हैं। यही नहीं 882 गांवों में फागिंग के लिए महज नौ किलो ही एसपी (सिंथेटिक पायराथ्राइड) है। ऐसे में मलेरिया व डेंगू से निपटने के विभाग के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले के सहायक मलेरिया अधिकारी को करीब दो साल पहले मच्छर घनत्व की जांच और निगरानी के लिए प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद भी विभाग को जरूरी उपकरण नहीं मिल सके। मच्छरों को पकड़ने और उनकी प्रजाति की पहचान के लिए आवश्यक उपकरणों के साथ केज पेट्रीडिस, हैंड लेंस, माइक्रोस्कोप और टेस्टिंग संबंधी सामान तक उपलब्ध नहीं हैं। कैस्टर ऑयल की भी कमी बताई जा रही है।
वहीं सहायक मलेरिया अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि जरूरत पड़ने पर दूसरे जिलों से उपकरण मांगकर मच्छरों की जांच और निगरानी का काम किया जा रहा है। इससे समय पर सर्वे और जांच करने में परेशानी होती है। खासकर डेंगू मलेरिया के प्रकोप बढ़ने की स्थिति में मच्छरों के घनत्व और उनके स्रोत का पता लगाने में दिक्कत आती है।
विभाग के पास नहीं है ये उपकरण
स्वास्थ्य विभाग में मच्छर पकड़ने का उपकरण, मच्छर के घनत्व की जानकारी के लिए मशीन, केज पेट्रीडिस, हैंड लेंस बड़ा, माइक्रोस्कोप और टेस्टिंग संबंधी सामान तक उपलब्ध नहीं हैं। कैस्टर ऑयल आज की तारीख में जिले में एक बूंद नहीं है। शहर या ग्रामीण क्षेत्र में अगर मच्छर जनित रोग का प्रकोप बढ़ता था तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से गोरखपुर जिले से प्रशिक्षित लोगों को बुलाकर जिले में मच्छर के घनत्व, मच्छर के प्रकार सहित अन्य जरूरी जानकारी प्राप्त की जाती थी। हालांकि अब प्रशिक्षित कर्मचारी होने के बाद भी कारगर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
हरेक ब्लॉक में एक-एक फागिंग मशीन
डिप्टी सीएमओ डॉ. केपी सिंह ने बताया कि ब्लॉक की सीएचसी पर एक-एक फागिंग मशीन है। इसके लिए विभाग की ओर से एक एक कर्मचारी को प्रशिक्षित किया गया है। अभी जिले में 9 किलो सिंथेटिक पैराथ्राइड है। जबकि कालाजार रोगी के क्षेत्र में छिड़काव के लिए 50 किलो सिंथेटिक पैराथ्राइड की और आवश्यकता होगी। इसके अलावा एंटी लार्वा जिले में 120 किलो उपलब्ध है। विभाग में जरूरी उपकरण उपलब्ध है। अगर कहीं समस्या हो रही है तो उसका समाधान कराया जाएगा।