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Maharajganj News: दूसरे फेज के 11 गांवों में अगले महीन से मुआवजा देने की तैयारी

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अंडरपास के लिए खोदाई करता जेसीबी।
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महराजगंज। जिले में बहुप्रतीक्षित नई रेल लाइन निर्माण परियोजना को लेकर कार्य में तेजी आ गई है। घुघली से महराजगंज वाया आनंदनगर तक प्रस्तावित नई रेल लाइन के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। दूसरे फेज के तहत आने वाले 11 गांवों में जनवरी से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के लिए अवार्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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जानकारी के अनुसार, घुघली से महराजगंज होते हुए आनंदनगर तक प्रस्तावित यह नई रेल लाइन कुल 52.70 किमी लंबी है। रेलवे विभाग द्वारा पहले फेज में शामिल 29 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इन गांवों में रेल लाइन निर्माण के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण कर प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण का कार्य किया जा रहा है। कई गांवों में किसानों को मुआवजा मिल चुका है, जबकि शेष गांवों में भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
पहले फेज के कार्यों में तेजी आने के बाद अब विभाग ने दूसरे फेज पर फोकस बढ़ा दिया है। दूसरे फेज के तहत कुल 23 गांवों में रेल लाइन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना है। इनमें से नौ गांवों में अधिग्रहित की गई भूमि के बदले प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है। शेष 14 गांवों में अब नए सिरे से अवार्ड तैयार करने की तैयारी की जा रही है। रेलवे विभाग का कहना है कि इन 11 गांवों में अवार्ड बनने के बाद मुआवजा वितरण का रास्ता साफ हो जाएगा और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी आएगी। 11 गांवों में जनवरी माह के दूसरे सप्ताह से अवार्ड बनाए जाने हैं, उनमें खजुरिया, महदेवा गोबिंदपुर, गोपालापुर, खनुआ, परसिया बुजुर्ग, देउरवा, जंगल जोगिया बारी, अलहदिया महदेवा, गोपालापुर और कम्हरिया बुजुर्ग शामिल हैं। इन गांवों में बड़ी संख्या में किसानों की भूमि प्रस्तावित रेल लाइन के दायरे में आ रही है। ऐसे में मुआवजा निर्धारण को लेकर किसानों की नजरें रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकी हुई हैं। रेलवे विभाग की ओर से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए विशेष योजना तैयार की गई है। इसके तहत भूमि अध्याप्ति कार्यालय के राजस्व कर्मी, रेलवे विभाग के सेक्शन इंजीनियर समेत अन्य संबंधित अधिकारी और कर्मचारी संयुक्त रूप से इन गांवों में जाकर सर्वे करेंगे। सर्वे के दौरान सबसे पहले उन किसानों की पहचान की जाएगी, जिनकी भूमि रेल लाइन निर्माण की जद में आ रही है। अधिकारियों द्वारा प्रभावित किसानों की जमीन से जुड़े सभी प्रपत्रों की जांच की जाएगी। इसमें खतौनी, खसरा, नक्शा और अन्य राजस्व अभिलेखों का मिलान किया जाएगा। अधिकारियों द्वारा यह सर्वे किया जाएगा कि जमीन मुख्य सड़क पर स्थित है, लिंक रोड पर है, चकरोड पर है या फिर सामान्य कृषि भूमि है।
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सभी आवश्यक कागजात एकत्र किए जाएंगे
यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किस गाटा में कितनी भूमि अधिग्रहित की जा रही है और उस गाटा में कितने लोगों के नाम दर्ज हैं। कई मामलों में एक ही गाटा पर एक से अधिक किसानों की हिस्सेदारी होती है। ऐसे में सभी खातेदारों की सही पहचान कर उनके हिस्से के अनुसार मुआवजा तय किया जाएगा। राजस्व कर्मी और रेलवे विभाग के अधिकारी किसानों से मौके पर ही पूछताछ भी करेंगे, ताकि अभिलेखों और वास्तविक स्थिति में किसी प्रकार का अंतर न रह जाए। किसानों से उनकी जमीन से संबंधित सभी आवश्यक कागजात एकत्र किए जाएंगे। इसके बाद इन कागजातों का मिलान राजस्व रिकॉर्ड से किया जाएगा। यदि किसी प्रकार की त्रुटि या विवाद सामने आता है, तो उसका समाधान मौके पर ही करने का प्रयास किया जाएगा।

मुआवजा निर्धारण में दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में रेलवे विभाग और भूमि अध्याप्ति विभाग की भूमिका अहम होगी। दोनों विभाग मिलकर यह तय करेंगे कि सड़क, लिंक रोड, चकरोड और केवल कृषि भूमि के लिए मुआवजा देने की क्या गाइडलाइन लागू होगी। अधिकारियों का कहना है कि मुआवजा निर्धारण में दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। सभी आवश्यक सर्वे, जांच और मिलान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्येक प्रभावित किसान के लिए गाटा वार मुआवजा तय किया जाएगा।

किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जा रही है। किसी भी किसान के साथ अन्याय न हो, इसके लिए सभी स्तर पर सावधानी बरती जा रही है।
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नंद प्रकाश मौर्य, प्रभारी भूमि अध्याप्ति अधिकारी
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