ईटहिया शिवमंदिर में सीसीटीवी कैमरे की नजर में रखेंगे श्रद्धालु, मंदिर परिसर को सजाया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले के भारत नेपाल बॉर्डर से सटे पंचमुखी शिवधाम ईटहिया शिवमंदिर, हरखोड़ा, सेखुई, कटरा, बउरहवा बाबा सहित अन्य शिवालयों में आज से लगने वाले श्रावणी मेले को लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है। पंचमुखी शिव मंदिर ईटहिया के गर्भ गृह में लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पंखे लगाए गए हैं। सावन में श्रद्धालु व कांवरिये नेपाल राष्ट्र के नवलपरासी जिला अंतर्गत त्रिवेणी धाम से जल लेकर शिवालय में भगवान भोलेनाथ का दर्शन कर जलाभिषेक करेंगे।
पंचमुखी शिवधाम ईटहिया शिव मंदिर के पुजारी ध्यानचंद गिरी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा का ख्याल रखा जाएगा। श्रावणी मेले की सारी तैयारी पूरी की जा चुकी है। पूरे मंदिर परिसर को सजाया गया है। दोमास लगने के कारण इस बार दाे महीने तक के लिए व्यवस्था की गयी है। सावन में श्रद्धालु व कांवरिये करीब 40 किलोमीटर दूर नेपाल राष्ट्र के नवलपरासी जिला अंतर्गत त्रिवेणी धाम से जल लेकर मंदिर आते हैं। मंदिर पर विगत कुछ वर्षों से श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। मंगलवार को विधिवत रूप से भगवान शिव का पूजन अर्चन कर मेले का शुभारंभ किया जाएगा। सावन में आठ सोमवार का योग बन रहा है।
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ईटहिया शिवमंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
क्षेत्राधिकारी अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि सावन माह में करीब छह एकड़ परिक्षेत्र में फैले पंचमुखी शिवधाम ईटहिया में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा मंदिर परिक्षेत्र के चारों तरफ आठ बैरिकेडिंग की गई है। वहीं, कई किलोमीटर पहले ही वाहनों को रोक दिया जाएगा। भीड़ नियंत्रण को लेकर ईटहिया शिव मंदिर से लमुहा तालाब तक तीन शितलापुर मार्ग पर एक रेंगहिया मार्ग पर दो, अमडी पुल मार्ग पर दो बैरियर लगाए गए हैं।वही, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजस्व विभाग से 15 लेखपाल, पुलिस विभाग के 100 आरक्षी, 12 मुख्य आरक्षी, 15 महिला आरक्षी, दो ट्रैफिक गार्ड, 14 उपनिरीक्षक, पांच थानेदार, डेढ़ सेक्शन पीएसी के साथ मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
कचड़े से सनी सड़क से गुजरेंगे कांवरिए
भारत नेपाल बॉर्डर से सटे रेंगहिया गांव के रहने वाले ग्रामीण सुग्रीव, मुनीब, रामचंद्र, दशरथ आदि ने बताया कि सावन में नेपाल राष्ट्र के त्रिवेणी धाम से जल लेकर पंचमुखी शिवमंदिर जाने का यह मुख्य मार्ग है। जिसपर हल्की बारिश से जलभराव और कीचड़ हो जाता है। ऐसे में श्रद्धालु व कावरियों के लिए यह डेढ़ किलोमीटर लंबी बदहाल सड़क मुसीबत हो जाती है।