महराजगंज। जिले के संचालित पोल्ट्री फार्म में पशु चिकित्सा विभाग नियमित जांच में लापरवाही बरत रहा है। हर छह माह पर पोल्ट्री फार्म की जांच व संचालकों को जागरूक करने का नियम है, लेकिन पिछले आठ माह से जिले के किसी भी फार्म की जांच नहीं की गई। विभाग बिना जांच किए ही सभी पोल्ट्री फार्म को सुरक्षित समझकर रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
बता दें कि जिले में करीब 1300 फार्म हैं जहां से रोजाना बड़े पैमाने पर मुर्गे बिक्री के लिए दुकानदारों के पास भेजे जाते हैं। फार्म से बेचे गए मुर्गे स्वस्थ हैं, उन्हें कोई संक्रामक रोग तो नहीं यह जांचने की फुर्सत विभाग को नहीं है।
पोल्ट्री फार्मों में साफ-सफाई का बेहतर ध्यान न देने तथा खिलाए जाने वाली सामग्री की पड़ताल किए बिना मुर्गे संक्रामक बीमारियों के चलते रोगी हो जाते हैं। जब यह बिक्री के बाद मनुष्यों का भोजन बनते हैं तो उन्हें भी रोगग्रस्त कर देते हैं। ऐसा ही एक व्यापक पैमाने पर फैलने वाला रोग बर्ड फ्लू है, जिसके चलते दो वर्ष पहले क्षेत्र के पोल्ट्री फार्म संचालकों को नुकसान भी झेलना पड़ा। यह रोग मुख्यतः तब फैलता है जब ठंड के समय प्रवासी पक्षी मैदानी इलाकों में आते हैं और गर्मी बढ़ने पर जब वापस चले जाते हैं।
2022 में जिले से सटे नेपाल में इसका व्यापक प्रभाव मार्च के महीने में ही देखा गया था। इसके चलते स्थानीय पोल्ट्री फार्म संचालक भी रेट घटने के कारण प्रभावित हुए थे। उस समय नेपाल की राजधानी काठमांडू सहित पोखरा और चितवन जैसे जिलों में बर्ड फ्लू ने पांव पसारे थे और भारत-नेपाल की खुली सीमा को देखते हुए रोग फैलने का खतरा सीमावर्ती भारतीय जिलों तक आ पहुंचा था।
शिकारपुर क्षेत्र के पोल्ट्री फार्म संचालक मुस्तफा और मोबिन, फरेंदा के अंकित चौधरी व नीरज ने बताया कि आठ माह पहले पशु चिकित्सा विभाग के कर्मी आए थे और साफ-सफाई के साथ जरूरी कार्य बता गए। तबसे कोई कर्मी नहीं आया।