महराजगंज। सुअर पालन अब गंदा काम नहीं रह जाएगा। गाय, भैंस और बकरी पालन की तरह इनका पालन तरीका भी बेहतर और साफ-सुथरा किया जाएगा। इसके लिए व्यक्तिगत लाभार्थी चयन कर पिगरी शेड (सुअर बाड़ा) का निर्माण मनरेगा से कराया जाएगा।
प्रत्येक पिगरी शेड पर दो लाख रुपये तक खर्च अनुमन्य किया गया है। शासन से प्राप्त निर्देश के क्रम में सीडीओ अनुराग जैन ने सभी खंड विकास अधिकारियों और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों से व्यक्तिगत लाभार्थी चयन के लिए सुअर पालन करने वाले या इच्छुक पात्रों से आवेदन लेकर मनरेगा सेल को प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं।
वैश्विक परिदृश्य में आयात और निर्यात होने वाले सामग्रियों पर टैरिफ वार (कर व्यवस्था) शुरू हुई है। ऐसे में शासन की तरफ से उन उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयास शुरू किए गए हैं, जिसके निर्यात में छूट की उम्मीद है।
इसी क्रम में अब सुअर पालन का तरीका साफ-सुथरा और आधुनिक बनाकर इससे भी पशुपालन करने के इच्छुकों को जोड़ने पर काम शुरू हो गया है।
ग्राम पंचायतों में पालन के पिगरी शेड निर्माण कराया जा सकेगा। इसके लिए सिर्फ पात्रों को आवेदन स्थानीय ब्लाॅक में करना होगा। प्रत्येक शेड पर दो लाख रुपये तक खर्च होंगे।
प्रोटीन का सस्ता स्रोत: पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. हौसला प्रसाद ने बताया कि सुअर का मांस प्रोटीन का अच्छा और सस्ता स्रोत है। इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, जिनके, विटामिन बी 6, बी 12 पर्याप्त मात्रा में होता है। नागालैंड, मिजोरम के अलावा अमेरिका सबसे बड़ा खरीदार है।