महराजगंज। गोरखपुर-सोनौली हाईवे निर्माण में कुछ स्थानों पर मुआवजा मिलने में अवरोध है। पीड़ित हाईकोर्ट की शरण में गए हैं। इनमें ज्यादातर वे लोग हैं जिनके पास मकान के अलावा कुछ नहीं है। इन लोगों ने न्यायालय से उचित मुआवजा दिलाने की मांग की।
मामले में न्यायालय के आदेश पर सर्वे भी शुरू हो गया है। जांच में यह देखा जा रहा है कि पीड़ितों के पास मकान के अलावा कुछ है या नहीं। इसकी रिपोर्ट तैयार कर भूमि अध्याप्ति विभाग को भेजी जाएगी। जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग 24 के चौड़ीकरण में कई गांवों के मकान और दुकानें प्रभावित हो रही हैं। पांच परिसंपत्तियों के स्वामियों ने हाईकोर्ट प्रयागराज में याचिका दाखिल की।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जिन मकानों व दुकानों को ध्वस्त किया जा रहा है, वह एकमात्र संपत्ति है। उनके पास इसके अलावा कहीं न खेती योग्य जमीन है और न ही कोई अन्य साधन है। इस स्थिति में केवल मुआवजा राशि पर्याप्त नहीं है। बल्कि जीवन-यापन और व्यवसाय पुन: स्थापित करने के लिए विशेष सहायता राशि की आवश्यकता है। परसा गांव की साजिदा ने बताया कि मकान के अलावा कुछ नहीं है।
मकान ध्वस्त होने के बाद कुछ नहीं बचेगा। ऐसे में रहने व रोजगार के लिए समस्या होगी। मकान का मुआवजा पर्याप्त नहीं है। इस पर विचार होना चाहिए। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। टीम सर्वे कर रही है। फरेंदा बुजुर्ग गांव के अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि मकान टूट गया है। रहने के लिए किसी तरह से व्यवस्था की गई।ं