एक फारेस्टर के भरोसे 16 सौ हेक्टेयर वन क्षेत्र की जिम्मेदारी
निचलौल (महराजगंज )। सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग की शिवपुर रेंज इन दिनों संसाधनों के अलावा वनकर्मियों की कमी से जूझ रहा है। यहां अभी रेंजर के अलावा महज एक फारेस्टर और रेंज परिसर की देखभाल करने के लिए एक माली की तैनाती है। जिसके चलते एक फारेस्टर के जिम्मे पूरी जंगल की रखवाली करने की जिम्मेदारी चुनौती बनी रहती है।
इतना ही नहीं, वन विभाग ने वनों की सुरक्षा के लिए रेंज परिसर में जो संसाधन रखे हैं। उनसे इनकी सुरक्षा महज औपचारिक है। रेंज कार्यालय के दफ्तर में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक वन रेंज क्षेत्र में दो बीट 54 और 55 हैं। दोनों बीट के जंगलों का क्षेत्रफल 16 सौ हेक्टेयर भूमि में फैला हुआ है। हालांकि जंगल की वनस्पतियों और वन्यजीवों की रखवाली के लिए रेंज कार्यालय पर रेंजर और माली वेद प्रकाश मिश्रा के अलावा महज एक फारेस्टर रामफेर की तैनाती की गई है। सोहगीबरवां निवासी शिवबचन, रामसेवक, कमलेश का कहना है कि एक जमाने में इस मनोरम जंगलों के बीच बीट संख्या 54 में स्थित काठ बंगला जंगल की शोभा बढ़ा रहा है। लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते आज यह बंगला बदहाली का दंश झेल रहा है।
शिवपुर रेंजर अनूप कुमार वर्मा ने कहा कि 16 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले जंगल में शीशम, खैर, जामुन के अलावा सेमर प्रजाति के वृक्ष अधिकांश मात्रा में पाए जाते हैं। यह जंगल नेपाल राष्ट्र से निकली नारायणी नदी के किनारे बसने के चलते नेपाल बॉर्डर और बिहार राज्य के वाल्मीकि नगर को छूता है। आमतौर पर इस जंगल में जंगली सूअर, नीलगाय, हिरन, शाही प्रजाति के जानवर पाए जाते हैं। जबकि वन रेंज क्षेत्र का जंगल नेपाल राष्ट्र और बिहार राज्य के वाल्मीकि नगर जंगलों से सटे होने के चलते यहां पर बाघ, तेंदुआ के अलावा गैंडा भी देखे जाते हैं।
------------------
संसाधन के नाम पर वनकर्मियों को महज लाठियां
दुर्गम इलाकों में स्थित वन रेंज क्षेत्र के जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रेंज कार्यालय में हथियार के नाम पर एक रायफल और एक डबल बैरियर बंदूक है। वह भी जंग खा चुकी है। ऐसे में अब वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वनकर्मियों को केवल लाठी, टार्च के अलावा उनकी वर्दी ही होती है। इतना ही नहीं उनके पास तो जंगलों में गश्त करने के लिए कोई वाहन भी उपलब्ध नहीं है।
संसाधनों की कमी को पूरा करने और रिक्त वनकर्मियों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। वन संपदा की सुरक्षा के लिए पूरे मनोयोग से कर्मी जुटे हैं।
- राकेश चंद यादव, एसडीओ