मौन रहे हाकिम तो फिर डूबेगी हजारों एकड़ फसल
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महराजगंज। अतिक्रमण की वजह से जिले के अधिकतर ड्रेन या तो अपना वजूद खोते जा रहे हैं या फिर सिकुड़ते नजर आ रहे हैं। कहीं ड्रेन के टेल पर खेती हो रही है तो कहीं मुख्य सड़क के किनारे ड्रेनों पर आशियाने बन गए हैं।
इन ड्रेनों को बचाने की चिंता न तो सिंचाई विभाग को हैं और न ही राजस्व विभाग को। जिसका नतीजा यह हुआ है कि बेरोकटोक ड्रेनों पर कब्जा जारी है। ड्रेनों पर अतिक्रमण की वजह से पिछले साल बरसात में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे और काफी बड़े क्षेत्र में फसलें जलमग्न हो गई थीं। इस साल भी हालात कुछ वैसे ही बन रहे हैं। ऐसे में 50 करोड़ से अधिक के नुकसान की खतरा मंडरा रहा है।जिले में ड्रेनों की स्थिति पर गौर करें तो यहां कुल 91 ड्रेन हैं। इसमें सबसे कम 300 मीटर और सबसे अधिक 15 किमी. लंबे हैं। अधिकांश ड्रेन उथले हो चुके हैं, जिसकी वजह से काश्तकार इन पर कब्जा करते जा रहे हैं। आज स्थिति यह है कि अधिकांश ड्रेन सिकुड़ गए हैं। अतिक्रमण की वजह से कई स्थान पर उनका अस्तिव खतरे में पड़ गया है।कई जगह इन ड्रेनों पर अवैध रूप से मकान बना लिए गए हैं। हैरानी की बात तो यह है कि कब्जेधारियों की इस करतूत पर किसी जिम्मेदार की नजर नहीं जा रही। ऐसे में अगर बरसात से पहले अवैध कब्जे नहीं हटाए गए और ड्रेनों की सफाई नहीं हुई तो इस साल भी हजारों एकड़ फसलों का जलमग्न होना लगभग तय है। सिंचाई खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता डीके सिंह ने कहा कि ड्रेन सिंचाई विभाग की संपत्ति नहीं है। यह पूरी तरह से राजस्व विभाग का मामला है। ऐसी दशा में ड्रेनों से अतिक्रमण हटाने का दायित्व राजस्व विभाग का है। उधर, एसडीएम सदर देवेश गुप्ता ने कहा कि ड्रेन पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसकी जांच पड़ताल कर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।