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Maharajganj News: पोषाहार बंट नहीं रहा.... मैसेज आ रहा आपको राशन मिल गया

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-नियमित निगरानी नहीं होने से कई जरूरतमंद लाभार्थी अनुपूरक पोषाहार व बाल पुष्टाहार से हो रहे वंचित
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संवाद न्यूज एजेंसी

निचलौल। शहर से लेकर मुसहर बस्तियों में कुपोषण मिटाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए ब्लॉक क्षेत्र में कुल 296 आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। जिम्मेदारों की ओर से नियमित निगरानी नहीं होने से लाभार्थी अनुपूरक पोषाहार व बाल पुष्टाहार से वंचित हो जा रहे हैं। पोषाहार कई माह से बंट ही नहीं रहा, लेकिन लाभार्थियों को मोबाइल पर पोषाहार मिलने का मैसेज आ जा रहा है।

बाल विकास परियोजना कार्यालय से दी गई जानकारी के मुताबिक ब्लॉक क्षेत्र में शहर से लेकर मुसहर बस्तियों में कुल 296 आंगनबाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी 261 और सहायिका 196 सेवा दे रही हैं। वहीं इस योजना से जुड़े 28395 लाभार्थियों हैं। इनमें 1353 बच्चे कुपोषित शामिल हैं। लिहाजा, पहले से ही बेहद गरीबी और प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे लाभार्थी के बच्चे की थाली में पौष्टिक आहार नहीं पहुंच पा रहा है। इस आशंका से इन्कार भी नहीं किया जा सकता कि इनके बच्चों के शारीरिक विकास व मानसिक विकास मानक से पिछड़ जाएगा।
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सिधावे निवासी अनिल कसौधन ने कहा की बेटी आराध्य डेढ़ वर्ष की है। पोषाहार मिले तीन माह हो चुका है, लेकिन उनके मोबाइल पर पोषाहार मिलने का मैसेज आ चुका है। इसमें लिखा है कि “सही पोषण देश रौशन, प्रिय (लाभार्थी बच्चे का नाम) आपका टेक होम राशन (टीएचआर) राशन आज दे दिया गया है। यदि आपको अपना (टीएचआर) प्राप्त नहीं हुआ है या आप अपनी प्रतिक्रिया साझा करना चाहते हैं, तो कृपया पोषण हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय। इसकी शिकायत वह जिलास्तरीय संपूर्ण समाधान दिवस में कर भी चुके है। इस तरह के मैसेज अन्य कई लोगों के मोबाइल पर आये होंगे। इसी गांव के एक लाभार्थी बच्चे के पिता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि “मेरे मोबाइल पर भी राशन वितरण का मैसेज आया, लेकिन राशन नहीं मिला।

खोन्हौली निवासी श्रीनिवास ने बताया की एक पोती ढाई वर्ष तो दूसरी एक वर्ष से कम उम्र की है। करीब तीन माह पहले केवल छोटी पोती को पोषाहार मिला था। तभी से उन्हें पोषाहार नहीं मिला। पोषाहार से संबंधित जानकारी पूछने पर आंगनबाड़ी से लेकर विभाग के जिम्मेदार चुप्पी साध लेते हैं। इसी गांव के रहने वाले राजकुमार गुप्ता ने कहा उनकी एक ढाई वर्ष की बिटिया है। बिटिया को तीन माह पहले पोषाहार मिला था। तभी से पोषाहार नहीं मिला। जिम्मेदारों की ओर से पोषाहार वितरण में लेट-लतीफी की जाती है। यही कारण है कि पोषाहार के अभाव में पौष्टिक चक्र टूट जाता है। इतना ही नहीं, बाल पोषाहार नहीं होने से भी अभिभावक भी बच्चों की खुराक पर ध्यान देना छोड़ देते हैं। ऐसे में कुपोषित बच्चों को मुख्यधारा में लाना और चुनौतीपूर्ण होता चला जा रहा है। लाभार्थी बच्चे के पिता हिरदेश कसौधन ने कहा की उनके दो बिटिया को तीन माह से पोषाहार नहीं मिल रहा है।
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प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी गुंजनलता श्रीवास्तव ने कहा की मई, जून और जुलाई का पोषाहार अगस्त में आया है। मई महीने का पोषाहार वितरण करने के लिए अधिकांश जिम्मेदार उठान भी कर चुके हैं। अभी भी आठ गांव की ओर से उठान नहीं किया गया है। समूह और आजीविका मिशन की लापरवाही के चलते पोषाहार की आपूर्ति बेहतर तरीके से नहीं हो पा रहा है।
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पोषाहार वितरण में लापरवाही की शिकायत मिल रही है। मामले की जल्द ही जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

-दुर्गेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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