अरे भाई, डिहुलिया टोला नहीं, अब छत्रपति साहू जी महराज नगर बोलिए
अंग्रेजों के जमाने के पहले से ही यह टोला डिहुलिया के नाम से जाना जाता था नया नाम मिलने से लोगों में खुशी, नाम बोलने में लगता था अटपटा
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नगर पालिका क्षेत्र के विस्तार का दायरा बढ़ा तो बहुत कुछ बदल गया। कल तक जो नाम जुबां पर आते ही अटपटा सा लगता था, अब वह ठीक हो गया है। डिहुलिया टोला अब छत्रपति साहू जी महराजगंज नगर बन गया है। यहां के बाशिंदो को अच्छा महसूस हो रहा है। विकास को गति मिलने के साथ ही अटपटे नाम से मुक्ति मिल गई है। मोहल्ले के बुजुर्ग बताते हैं कि अंग्रेजों के जमाने के पहले से ही यह टोला बसा था। डिहुलिया नाम लेने में थोड़ा सा अटपटा लगता था।
विकास के पथ पर महराजगंज आगे बढ़ा तो इस इलाके का भी तेजी से नजारा भी बदल गया। सड़कें, बिजली, पानी जैसी मुलभूत सुविधा बेहतर होने लगी हैं। जो जमीन कौड़ी के भाव भी नहीं बिक रही थी, वही, अब सोने के भाव बिक रही हैं। टोले का नाम डिहुलिया होने से लोगों को खटकता था। बहुत सारे लोगों ने नाम बदलवाने का उपाय भी किया, लेकिन कुछ खास सफलता नहीं मिली।
नगर पालिका सीमा का विस्तार हुआ तो नगर पालिका बोर्ड की बैठक में सभासदों ने मोहल्लों का नाम बदलवाने के लिए प्रस्ताव दिया। इससे कई मोहल्लों का नाम बदल गया। डिहुलिया टोले के लोग कहते हैं कि अरे भाई अब डिहुलिया नहीं छत्रपति साहू जी महराज नगर बोलिए।
बदलाव जरूरी था, बेहतर हुआ
बाबू जी जब कभी पास में फुर्सत के समय बैठते थे, तो ऐसे नामों के बारे में बताते थे। कई स्थानों के नाम तो जाति विशेष पर रखे गए थे, जो वर्तमान समय में बोलने पर परेशानी का कारण बन सकता है। टेढ़वा कुटी भी अब छत्रपति साहू जी नगर के नाम से जाना जाएगा। महुअवा का पहलवान टोला भी इसी में शामिल हुआ है। बुजुर्गों से सुना है कि पुराने जमाने में वहां पहलवानी में लोग ज्यादा रुचि रखते थे, इस वजह से नाम हो गया। नगर पालिका क्षेत्र में अटपटे नामों को बदल जाने से अच्छा हुआ। लोगों को नाम बोलने में गर्व महसूस हो रहा है। पुराने नामों को बदलने के साथ ही विकास को गति मिल रही है।
-डॉ. सिद्धार्थ नाथ शुक्ल, पूर्व सभासद, शास्त्री नगर
मायके वाले मजाक उड़ाते थे
डिहुलिया नाम मायके वाले सुनकर मजाक उड़ाते थे। पहले यह गांव था। अब महराजगंज नगर का हिस्सा बन गया है। विकास कार्यों को कराया जा रहा है। जब यह सुना कि नगर में गांव शामिल हो गया है तो अच्छा लगा। सबसे ज्यादा खुशी की बात है कि छत्रपति शाहू जी महराज नगर किसी को बताने में बेहतर रहेगा।
-सीमा देवी, स्थानीय नागरिक
बोलने में नहीं लगता था ठीक
जीवन के सत्तर वर्ष गुजर गए। गांव में डीह बाबा का स्थान हुआ करता था तो इस वजह से डिहुलिया कहा जाने लगा। अधिक लोग यही कहने लगे तो यही नाम हो गया। बोलने में थोड़ा ठीक नहीं लगता था। वक्त के साथ बहुत कुछ बदल रहा है। विकास को गति मिल रही है। आने वाले दिनों में क्षेत्र का नक्शा ही बदल जाएगा।
-मुसई चौहान, स्थानीय नागरिक
जमीन का बढ़ गया है भाव
महराजगंज शहर से गांव तक आने में रात के समय में डर लगता था। नहर के रास्ते घर तक आते थे। बदलाव की हवा बह रही है। जमीन पहले कोई इधर खरीदना नहीं चाहता था। अब तो जमीन लेने के लिए होड़ मची रहती है। बड़े-बड़े पूंजीपति जमीन आसपास खरीद कर छोड़ दिए हैं। अब पहले वाला डिहुलिया नहीं, छत्रपति शाहू जी महराज नगर हो गया है।
-रामजतन प्रसाद, स्थानीय नागरिक
डिहुलिया कहने पर हंस देते थे लोग
वर्ष 1998 में आई बाढ़ में सड़क से पानी बह रहा था लेकिन गांव में नहीं पहुंचा था। चारों तरफ पानी दिख रहा था। घर तक पहुंचने में दुश्वारियों को झेलना पड़ा था। टोले की आबादी कम होने के कारण बहुत कम लोगों का आना-जाना रहता था। डिहुलिया नाम लोगों को बाहर बताने पर हंस देते थे। अब तो ऐसा नहीं होगा।
-नवरंग लाल विश्वकर्मा, स्थानीय नागरिक
रास्ता टेढ़ा होने से नाम पड़ गया टेढ़वा कुटी
शहर में बहुत कुछ बदलाव हो रहा है। बुजुर्गों से सुना था कि रास्ता टेढ़ा होने के साथ प्राचीन श्रीराम जानकी मंदिर है। यहां साधु-संतों को डेरा गुजरे वक्त में लगा रहता था। इस वजह से यहां का नाम टेढ़वा कुटी पड़ गया। यह अब छत्रपति साहू जी महराज नगर हो गया है। टेढ़वा नाम लेने में अटपटा सा लगता है।
-संजय पांडेय, व्यवसायी
विकास के लिए बदलाव जरूरी
विकास के लिए बदलाव जरूरी है। मोहल्लों के अटपटे नाम बदल जाने से नाम लेने के दौरान झिझक नहीं होगी। शहर की तमाम सड़कों के नाम भी महापुरुषों के नाम पर रख दिए गए हैं। दुकानों के बोर्ड पर अब नाम बदलवा दिया जाएगा। छत्रपति शाहू जी महराज नगर के नाम से बोर्ड लिखने के लिए दिया गया है।
-विमल पटेल, व्यवसायी
इन महापुरुषों के नाम पर सड़कों की होगी पहचान
केएमसी से लेकर गोरखपुर रोड पर नगर सीमा तक महात्मा गांधी मार्ग, जिला उद्योग से चौक तिराहा तक डॉ. भीमराव आंबेडकर मार्ग, सक्सेना तिराहे से पुलिस लाइन नगर सीमा तक स्वतंत्रता सेनानी डॉ. शिब्बनलाल सक्सेना मार्ग, चौक तिराहे से नगर पालिका सीमा तक सरदार वल्लभ भाई पटेल मार्ग, पड़री तिराहे से नगर पालिका सीमा तक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मार्ग, अमरुतिया तिराहे से नगर पालिका सीमा तक सुभाष चंद्र बोस मार्ग, हमीद नगर से बांसपार बैजौली संपर्क मार्ग तक सरदार भगत सिंह मार्ग, जलकल रोड से नगर पालिका सीमा तक वीर शहीद अब्दुल हमीद मार्ग, मुख्यालय मोड़ से सिविल न्यायालय तक जनरल मानेकशा मार्ग, चिउरहा पुलिया से एसएसबी मुख्यालय तक परमवीर चक्र विक्रेता योगेन्द्र सिंह यादव मार्ग व चिउरहां पुलिया से गबडुआ रोड तक चन्द्रशेखर आजाद मार्ग के नाम से जाना जाएगा।