महराजगंज। दिल्ली में पुलिस ने नकली दवा के धंधे का पर्दाफाश किया था। इसके तार महराजगंज से जुड़े हैं। मामले में जांच चल रही है। जिले के एक दवा कारोबारी का नाम इससे सामने आया है।
बीते दिन विशेष टीम ने पनियरा थाना क्षेत्र के खजुरिया चौराहे पर स्थित मेडिकल स्टोर पर छापा मारा। दुकानदार से घंटों पूछताछ कर दवाओं के नमूने जांच के लिए टीम अपने साथ ले गई।
बताया जाता है कि अगस्त में दिल्ली पुलिस ने नकली दवा रैकेट का पर्दाफाश किया था। इस गिरोह का जाल हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश तक फैला हुआ है। सरगना समेत छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि गिरोह हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के कारखानों से नकली दवाएं तैयार कर पूरे उत्तर भारत में सप्लाई करता था। इसमें महराजगंज के दवा विक्रेता का नाम भी सामने आया था।
शहर के बाजार में पड़ताल के दौरान जब एक दुकानदार से गैस की बड़ी कंपनी की दवा मांगी गई तो उसने उसके बदले में एक दूसरी कंपनी की दवा दी। दवा खरीदने वाले ने जब उससे वही दवा देने के लिए जो उसने मांगी थी तो दुकानदार ने अपनी दी हुई दवा की खूबियां बतानी शुरू कर दी। चार पत्ता दवा खरीदने पर छह रुपये कम भी कर दिए। दवा की मंडी में ऐसी कई दवाएं मौजूद हैं जिनपर दुकानदार मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
ब्रांडेड बेचने से उतना फायदा नहीं होगा जितना मिलते जुलते नाम की लोकल दवाएं बेचने से होगा। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की कंपनियों में बनीं ये दवाएं भी ब्रांडेड के आसपास के ही रेट पर बिकती हैं। असल में दवा खाने वाले को कोई खास नुकसान नहीं होता, इसलिए इसकी कोई शिकायत भी नहीं करता।
सीमावर्ती इलाके में सीरप का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा : सूत्रों की माने तो दवाओं के इस खेल के साथ बड़े पैमाने पर कोडिनयुक्त कफ सीरप का भी खेल चल रहा है।
इस साल्ट वाली कफ सीरप को बच्चों के लिए खतरनाक बताया गया है। इसमें अफीम का प्रयोग होता है, इसलिए इसका प्रयोग लोग नशे के लिए करते हैं। बताया जाता है कि बिहार और नेपाल के सीमावर्ती इलाके में बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है।
बिहार में शराब बंदी के चलते भी इसका प्रयोग बढ़ा है। इसे पीने वालों के मुंह से शराब की दुर्गंध नहीं आती, इसलिए भी इसकी मांग अधिक है। नेपाल सीमा क्षेत्र में इसकी खपत अधिक है।