सदर सीएचसी में रात के वक्त मरीजों को देखने वाला कोई नहीं
महराजगंज। सदर सीएचसी पर बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। यदि भूले भटके रात में कोई मरीज आ जाए तो उसे सेवा मिलना मुश्किल है। ऐसे में टेंपो या निजी वाहन से जिला अस्पताल जाना पड़ता है। 30 बेड़ के सीएचसी में मौके पर चार बेड ही उपलब्ध हैं, वह भी प्रसूताओं के लिए। प्रत्येक दिन 20 से 25 मरीज यहां इलाज कराने आते हैं। सदर सीएचसी में सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ समेत अन्य डॉक्टरों की तैनाती नहीं है।
सीएचसी सदर में अधीक्षक डॉ. केपी सिंह, डॉ. जय विजेंद्र, दंत चिकित्सक जितेंद्र कुमार समेत दो महिला डॉक्टर की तैनाती है। वर्तमान में एक महिला डॉक्टर प्रसूता अवकाश पर हैं। तीन फार्मासिस्ट शेष मणि कन्नौजिया, आशुतोष एवं विजय प्रताप की तैनाती है। एलटी राकेश त्रिपाठी, चंद्रजीत यादव को जांच करने में परेशानी होती है। क्योंकि स्थायी रूप से जांच करने के लिए कमरे की व्यवस्था नहीं है। तीन स्टाफ नर्स सुनीता, प्रियंका एवं बबिता की तैनाती है। सदर सीएचसी पर दो लाख 16 हजार की आबादी के इलाज की जिम्मेदारी है। इसके अधीन 60 गांव के 24 उपकेंद्र आते हैं। सरोजनी नगर के प्रभात सक्सेना, संजय कन्नौजिया, प्रिंस, आदित्य यादव ने बताया कि सदर सीएचसी में सुविधाओं का अभाव है। इमरजेंसी पड़ने पर जिला अस्पताल टेंपो से जाना पड़ता है। रात में इलाज की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। दिन में भी डॉक्टर समय से नहीं मिलते हैं। बच्चों के डॉक्टर यहां नहीं हैं। रविवार को दोपहर 12 बजे अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं मिला। गोपीकांध के मनोज एवं बागापार के सुमेर एक मरीज लेकर आए थे।
उधर, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष ज्ञानेंद्र नाथ द्विवेदी ने बताया कि सदर सीएचसी यदि बेहतर ढंग से संचालित होता तो जनता के साथ मेडिकल स्टोर संचालकों की रोजी-रोटी बेहतर ढंग से चलती। शहर के लोगों की सीएचसी पर बेहतर सुविधा नहीं मिल पा रही है।
जिला अस्पताल करीब होने के कारण ज्यादातर लोग वहीं चले जाते हैं। सीएचसी पर डॉक्टरों की तैनाती है। सभी समय से उपलब्ध रहते हैं। उपलब्ध संसाधन से बेहतर सेवा देने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. एके श्रीवास्तव, सीएमओ