-अनजान बने अधिकारी, गोदाम में मिली पुरानी रक्त चंदन की लकड़ी, ट्रक पर मिली नई लकड़ी, किस ट्रांसपोर्ट से लदी पता नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सीमा से सटे नौतनवा कस्बे में चंदन की लकड़ी बरामदगी के मामले में काले कारनामे की परत दर परत खुल रही है। गोदाम में मिली पुरानी रक्त चंदन की लकड़ी, ट्रक पर मिली नई लकड़ी, इस पर किसी की नजर नहीं है। अधिकारियों ने लकड़ी बरामद कर खामोशी की चादर ओढ़ ली है। पुरानी लकड़ी गोदाम में है, तो नई चंदन की लकड़ी किस ट्रांसपोर्ट से लादी गई है। इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है। सूत्र बता रहे हैं कि इसमें बड़ा रैकेट शामिल है।
सूत्रों की मानें तो ट्रक की कैविटी में चंदन की लकड़ी भरी हुई थी। वह ट्रक पहली बार भारत में आया था या नहीं, इसके बारे में पता लगाया जा रहा है। भारत के जंगलों में पाई जाने वाली रक्त चंदन नेपाल के रास्ते चीन पहुंचाई जा रही है। कस्टम विभाग की बड़ी कार्रवाई से एक बार फिर रक्त चंदन की तस्करी सुर्खियों में है। भारत-नेपाल सीमा सोनौली से अंतरराष्ट्रीय तस्करों ने एक बार फिर डेरा डाल दिया है। तस्कर रक्त चंदन को चीन पहुंचाकर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं।
नौतनवा कस्टम विभाग ने भारत-नेपाल के सोनौली बॉर्डर के पास नेपाली नंबर के बंद कंटेनर ट्रक से रक्त चंदन की लकड़ी बरामद की है। चंदन की लकड़ी ट्रक की छत के दो लेयर के बीच छिपाकर रखी गई थी, जिसमे नई लकड़ी बरामद हुई थी। नौतनवा और सोनौली के ट्रांसपोर्ट कंपनी जो दक्षिण भारत कर्नाटक से काम करते हैं, उसके ऊपर भी विभाग की नजर है। कस्टम के अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच की जा रही है।
ट्रांसपोर्ट कंपनी के ऊपर है विभाग की नजर
सीमावर्ती नगर में करीब ढाई टन रक्त चंदन लकड़ी की बरामदगी के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में फैले ट्रांसपोर्ट कंपनी के अवैध गोदाम पर विभाग ने नजर रखना शुरू कर दी है। बताया गया है कि जीएसटी विभाग में एक गोदाम है, इसके अलावा तीन से चार गोदाम अवैध बनाए गए हैं। इसकी जांच अब शुरू हो गई है। नेपाल से चीन बॉर्डर तातो पानी के शुरू होने के बाद नेपाल के रास्ते चीन के उत्पाद की भारत में तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। रक्त चंदन चीन भेजा जा रहा है।
-
कई राज्यों की एजेंसियों को चकमा देकर सोनौली कैसे पहुंचा ट्रक ?
रक्त चंदन की तस्करी में सीमा के कई धंधेबाजों व ट्रांसपोर्टरों से तार जुड़ सकते हैं। दक्षिण भारत से चीन तक रक्त चंदन पहुंचाने में लगे तस्करों का नेटवर्क कितना मजबूत है, इसका अंदाजा दक्षिण भारत से जांच एजेंसियों को धता बताकर सोनौली तक रक्त चंदन की खेप का पहुंचने से लगाया जा सकता है। भारत के कई राज्यों की एजेंसियों को चकमा देकर सोनौली कैसे पहुंचा इसकी भी एजेंसियां जांच में जुटी है। बरामदगी के बाद कस्टम विभाग के अलावा सरहद की अन्य खुफिया एजेंसियां भी चौकन्ना हो गई हैं। एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुट गई हैं।
-
सामान के बीच छिपाकर लाते हैं रक्त चंदन
आंध प्रदेश से गोरखपुर तक ट्रांसपोर्ट के सामानों के बीच रक्त चंदन की लकड़ी छिपा कर लाई जाती है। छोटे-छोटे ऑर्डर लाकर लोकेशन मिलने के बाद जनपद के दो प्रमुख रास्ते सोनौली और ठूठीबारी के रास्ते इसे भेज दिया जाता है। ट्रक की पासिंग और एक नंबर के समान के बीच हजार और पांच सौ के अंतर को रास्ते में पड़ने वाले सुरक्षा एजेंसी पुलिस कस्टम टोल और आरटीओ भी नहीं समझ पाते, जिसका फायदा उठा कर हजार पंद्रह सौ किलो की डील होती है। जो आसानी से सरहद तक पहुंच जाती है। बीते सप्ताह नेपाल में रक्त चंदन के साथ गिरफ्तार वैभव गिरी ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि तस्कर आंध्र प्रदेश से लकड़ी ट्रकों में दूसरे सामानों के बीच छिपाकर लाते हैं।
-
रक्त चंदन की चीन में पचास हजार रुपये किलो है कीमत
भारत सरकार ने रक्त चंदन की लकड़ी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके कारण इसकी तस्करी नेपाल के रास्ते होती है। यह आंध्र प्रदेश में पाया जाता है। जहां इसकी कीमत बहुत सस्ती है। तस्कर इसे चीन पहुंचा कर दो से तीन गुना लाभ कमा रहे हैं। बताया यह भी जा रहा है कि चीन में यह पचास हजार रुपये किलो के हिसाब में चीन के कारोबारी तुरंत खरीद लेते हैं।