-सिर्फ गोरखपुर और ठूठीबारी के लिए मिलती हैं नियमित बस
-तहसील मुख्यालयों तक जाने में भी लोगों को हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिला मुख्यालय का दर्जा होने के बाद भी विभिन्न क्षेत्रों से यहां पहुंचना और वापस जाने की व्यवस्था प्राइवेट वाहनों के हवाले है। ऐसा नहीं कि परिवहन निगम की बसों की व्यवस्था नहीं है। रोडवेज बसों का संचालन होने के बाद भी लोकल रूटों पर न तो समय से रोडवेज बस चलती है, और न ही नियमित संचालन होता है। प्राइवेट वाहनों से न सिर्फ यात्रा में अतिरिक्त समय लगता है, बल्कि पैसा भी अधिक खर्च करना पड़ता है।
महराजगंज डिपो के पास कुल 58 बसों का जत्था है, जिसमें निगम की बसों के अलावा अनुबंधित बसों की संख्या भी सम्मिलित है। इन बसों का संचालन सिर्फ दो रूटों पर सर्वाधिक है। अन्य रूटों पर जाने के लिए बसों का इंतजार करना पड़ता है। मुख्यालय से गोरखपुर अथवा निचलौल- ठूठीबारी को छोड़ दें तो और कहीं जाने के लिए नियमित बसों का संचालन नहीं होता। फरेंदा तहसील मुख्यालय जाने के लिए सुबह और शाम सिर्फ दो बसें चलती हैं। दिन में यहां के लिए कोई बस नहीं है। इसी प्रकार घुघली, सिसवा व पनियरा जाने के लिए सिर्फ एक ही बस संचालित होती है। इसके लिए समय तय न होने के कारण यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ती है। धानी, बहादुरी आदि क्षेत्र की ओर जाने के लिए तो बस सेवा ही नहीं है।
धीरज जायसवाल, प्रमोद अग्रहरी, संजीव राय व आदित्य गौतम ने बताया कि जिला मुख्यालय रेल सेवा नहीं जुड़ा है, जिसके कारण रोडवेज बसों का ही सहारा रहता है, लेकिन अधिकांश रूटों पर गिने चुने वाहन चलने से यात्री प्राइवेट साधनों के सहारे रहते हैं, जिसमें समय अधिक लगता है और पैसा भी अधिक खर्च करना पड़ता है।
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डिपो में जितनी बसें हैं, उसके अनुसार संचालन हो रहा है। बसों की संख्या बढ़ने पर सभी रूटों पर पर्याप्त बसों का संचालन हो सकता है।
-सर्वजीत वर्मा, एआरएम