- छह माह में जिले के 32 बच्चों में गंभीर जन्मजात बीमारियों की पुष्टि
- आरबीएसके की टीमों ने 1.63 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की
महराजगंज। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में मां की सेहत के प्रति लापरवाही बच्चों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है। जिले में बीते छह माह के दौरान हुई जांच में सात बच्चों में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (तंत्रिका ट्यूब दोष) की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्भधारण के शुरुआती 28 दिनों में फोलिक एसिड की कमी इस जन्मजात विकृति का प्रमुख कारण हो सकती है। समय पर जांच और उपचार से प्रभावित बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के नोडल प्रभारी डॉ. एमडब्ल्यू खान ने बताया कि जिले के सभी 12 ब्लॉकों में 24 टीमें बच्चों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। प्रत्येक टीम में पुरुष व महिला चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और एएनएम शामिल हैं। एक अप्रैल से 20 अगस्त तक टीमों ने 2130 स्कूलों और 3159 आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर 1,63,096 बच्चों की जांच की।
स्क्रीनिंग के दौरान स्कूलों में 3976 और आंगनबाड़ी केंद्रों पर 4626 बच्चे बीमार मिले। गंभीर बीमारी की आशंका वाले बच्चों को सीएचसी और जिला अस्पताल भेजा गया। विस्तृत जांच के बाद 32 बच्चों में गंभीर रोगों की पुष्टि हुई। इनमें सात न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट, 20 हृदय में छेद, दो मूक-बधिर, दो सिर में पानी भरने या आकार बढ़ने और एक बच्चे में आंख की गंभीर बीमारी सामने आई।
लखनऊ और अलीगढ़ भेजे गए गंभीर मरीज
गंभीर रोग से पीड़ित बच्चों को जरूरत के मुताबिक उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया गया। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से पीड़ित दो बच्चों का लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया संस्थान में उपचार कराया गया। हृदय में छेद वाले छह बच्चों का इलाज जेएनयू मेडिकल कॉलेज अलीगढ़, केजीएमयू लखनऊ समेत अन्य संस्थानों में कराया गया। बाकी बच्चों के उपचार की प्रक्रिया चल रही है।
शुरुआती जांच से बीमारी की पहचान संभव
आरबीएसके के डॉ. प्रज्ञानंद सागर ने बताया कि स्क्रीनिंग में गंभीर बीमारी मिलने पर बच्चे को पहले सीएचसी या जिला अस्पताल भेजा जाता है। वहां उपचार संभव नहीं होने पर उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर किया जाता है। उन्होंने अभिभावकों से नवजात की नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराने की अपील की, ताकि जन्मजात बीमारी की जल्द पहचान हो सके।
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गर्भावस्था में फोलिक एसिड का रखें ध्यान
आरबीएसके के डॉ. मंजय शर्मा के अनुसार न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट ऐसी जन्मजात विकृति है, जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के विकास को प्रभावित करती है। गर्भावस्था के पहले 28 दिनों में न्यूरल ट्यूब पूरी तरह बंद नहीं होने पर यह समस्या हो सकती है। फोलिक एसिड की कमी इसका प्रमुख जोखिम कारक है। गर्भावस्था के दौरान मधुमेह और धूम्रपान के संपर्क से भी जन्मजात विकृतियों का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने बताया कि स्पाइना बिफिडा न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का एक सामान्य प्रकार है, जिसमें रीढ़ की हड्डी का विकास प्रभावित होता है। गंभीर स्थिति में संक्रमण, लकवा तथा पेशाब-मल पर नियंत्रण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फोलिक एसिड, पौष्टिक आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान देना चाहिए। आरबीएसके के तहत ऐसे बच्चों को आवश्यकतानुसार निशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।