नेपाल : शहरों में कोचया साग की बढ़ी मांग
महराजगंज। सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग के जंगलों में प्राकृतिक वनस्पतियों की भरमार है। प्राचीन काल से ही भोजन में प्रयोग किए जाने वाले कोचया साग की मांग इन दिनों नेपाल के कई शहरों में काफी बढ़ गई है। नेपाल में इसकी अच्छी कीमत अदा कर लोग पसंद से स्वाद लेते हैं। फर्न प्रजाति के इस पौधे में आयरन, मिनरल समेत कई पोषक तत्वों के अलावा औषधीय गुण भी पाए जाते हैं।
सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग के निचलौल, मधवलिया और शिवपुर रेंज के जंगलों से सटे बसे मुसहर समुदाय के लोग किशुनधारी, बेलवारी, बेइला, गोपाल ने बताया कि बरसात के दिनों में कोचया साग की पैदावार जंगलों में बढ़ जाती है। इस साग की पैदावार जंगलों के बीच नदी, नालों के तट पर हर वर्ष अत्यधिक मात्रा में होती है। नेपाल में साग की बिक्री ज्यादा होती है। बरसात में इसी से काम चलाया जाता है।
यहां पहुंचते हैं व्यापारी
बॉर्डर उस पार सुस्ता, गुटी परसौनी, सकरदीन्ही, महेशपुर, चमन टोला, भगतपुरवा, गेरमा, विशुनपुरा, पड़री में व्यापारी जुटते हैं। इस साग की मांग नेपाल राष्ट्र के नवलपरासी, चितवन, काठमांडो सहित अन्य शहरों में है।
इस साग में भरपूर मात्रा में आयरन और मिनरल मौजूद है। इस सब्जी का उत्पादन वर्ष में केवल चार माह ही होता है। यह जंगलों के बीच नदी, नालों के किनारे उगते हैं। इसकी पहचान आसानी से हो जाती है। इसमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। पेट संबंधी बीमारियों में यह काफी फायदेमंद होता है।
-पौवनेश कुशवाहा, प्रवक्ता, वनस्पति विज्ञान, राजेंद्र प्रसाद ताराचंद महाविद्यालय, निचलौल
जंगलों के बीच नदी, नालों के किनारे उगने वाली कोचया वनस्पति की कटान पर प्रतिबंध है। इसे रोकने के लिए वन विभाग की टीम निरंतर जंगलों में गश्त कर रही है। जंगलों की सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
-चंद्रेश्वर सिंह, एसडीओ, वन विभाग