फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना से असमय मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

विज्ञापन
मृतक विजय यादव की पत्नी अपने बच्चो के साथ। - फोटो : MAHARAJGANJ
विज्ञापन
कोरोना से असमय मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
विज्ञापन

चार बेटियां व एक बेटे के पालन पोषण में परेशानी
वाहन चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे विजय
फरेंदा (महराजगंज)। कोरोना महामारी ने कई परिवारों के सपने ऐसे समय तोड़ दिए, जब उनके घर का कमाऊ व्यक्ति असमय काल के गाल में समा गया। ऐसा ही बाजारडीह के पकडीहा गांव के 38 वर्षीय विजय कुमार यादव के साथ हुआ।
फरेंदा क्षेत्र के बाजारडीह के पकडीहा गांव निवासी विजय कुमार यादव निजी वाहन चलाकर कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। दो भाइयों में बड़ा होने के नाते उनके कंधे पर परिवार की जिम्मेदारी थी। पिता की दो वर्ष पहले हुई मौत का दर्द परिवार झेल ही रहा था कि घर के कमाऊ बेटे ने भी परिवार का साथ छोड़ दिया। विजय की आठ मई की रात अचानक तबीयत खराब हुई। सांस लेने में तकलीफ होने लगी। परिजन उसे इलाज के लिए फरेंदा कस्बे के एक निजी अस्पताल ले गए। जहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रात 11 बजे जिला अस्पताल में पहुंचने पर चिकित्सक ने ऑक्सीजन की मदद से जीवन बचाने की कोशिश की, लेकिन 9 मई की सुबह विजय यादव की सांसें थम गईं। ऐसे में परिवार पर फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसका अंतिम संस्कार कोविड गाइडलाइन के अनुसार पवह नाला दुर्गा मंदिर पर किया गया। 10 वर्षीय बेटे प्रिंस ने मुखाग्नि दी। पति की मौत के बाद पत्नी गुड़िया देवी के कंधे पर चार बेटियों राधिका 13, नंदनी 8, रागिनी 6 व वंदनी 5 और बेटे प्रिंस को पालने की जिम्मेदारी आ गई। पत्नी ने बताया कि उनकी मौत के बाद बच्चों के परवरिश की चिंता सता रही है। शिक्षा, दीक्षा के साथ उनके पालने में आने कठिनाई को सोच कर परेशान हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन

कोरोना काल में असमय मौत से परिवार के सामने संकट हो गया है। हर संभव मदद का प्रयास किया जा रहा है। शासन से मिलने वाली सहायता उनके परिवार को दिलाने के लिए प्रयास होगा।
खुशनम प्रवीन, ग्राम प्रधान बाजारडिह
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें