फरेंदा। कहा जाता है कि पूत कपूत हो सकता है पर माता कुमाता नहीं हो सकती। जिस मां ने पाल पोसकर अपने बच्चों को बड़ा किया उन बच्चों ने ही उन्हें तिल-तिल मरने के लिए छोड़ दिया। आज वह वृद्धाश्रम में गुजर बसर कर रही हैं, लेकिन इसके बाद भी वह अपने कलेजे के टुकड़े के लिए सलामती की दुआ करती रहती हैं। मदर्स डे पर उनकी दिल की बात जानी तो कहा कि जिन बेटों ने बेघर किया उनके घर सलामत रहें। वह हमेशा खुश रहें।
बृजमनगंज क्षेत्र के शोभावती देवी (62) के तीन बेटे हैं। वह पति के साथ विगत चार माह से क्षेत्र के वृद्धाश्रम में हैं। घर पर सही सलामत देखभाल न होने के कारण वृद्धाश्रम में जिंदगी काट रही हैं। बताया कि तीन बेटों के बीच में आपसी कलह बना रहता हैं, घर में सुख शांति नही हैं। समय से खाना पानी न मिलने के कारण मजबूरी में वृद्धाश्रम में रह रही हूं। भले ही हम परेशानी में हैं लेकिन वह परिवार के साथ खुशी पूर्वक रहे यहीं दुआ रहती हैं।
-करमहां निवासी बिंदा देवी (65) विगत पांच वर्ष से वृद्धाश्रम में रहकर जीवन काट रही हैं। उनका एक बेटा और दो पोता, दो पोती हैं। फिर भी घर में रहने के लिए जगह नही हैं। दो जून का भोजन सही ढंग से नहीं मिल पाता है। जब घर में कोई सम्मान नहीं रह गया तो मजबूरी में आश्रम में पहुंची। जहां पर समय से पेट तो भर जाता है। औलाद से सुख की उम्मीद भी अब नहीं रही।
महावनखोर कैंपियरगंज निवासी शारदा देवी (73) हैं। जिनके चार बेटे हैं। जिनको पालने के लिए मां ने कमर तोड़ मेहनत किया लेकिन वहीं संतान आज ठुकरा दिए। वह तीन वर्षों से वृद्धाश्रम में रह रही हैं। बताया कि घर की आर्थिक स्थित ठीक न होने के कारण आपस में तनाव बना रहता था। पारिवारिक कलह हो रहा था। जिससे आजीज आकर वृद्धाश्रम में रह रही हैं। लेकिन हमेसा बच्चों के सलामती के लिए दुआएं करती हैं। तीज त्योहार मनाने के लिए घर पर जाती हूं, जहां एक दो दिन रहकर फिर आश्रम में आ जाती हूं। जहां समय से भोजन सहित अन्य सुविधाएं समय-समय पर मिलती रहती हैं।
गोरखपुर की माधुरी श्रीवास्तव (70) वर्ष जो विगत दो वर्षों से पति के साथ वृद्धाश्रम में रहती थीं। एक वर्ष पूर्व पति की मृत्यु हो गई। एक बेटा व तीन बेटियां हैं। घर पर देखभाल न होने से परेशान होकर आश्रम में पहुंची जहां पर बची जिंदगी कट रही हैं। पति की मौत के बाद बेटा देखभाल के लिए नहीं आया। फिर भी उनकी सलामती के लिए दुआ दे रही हूं कि वह परिवार के साथ सुखी रहे।
वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की उचित देखभाल करना पहला दायित्व है। उनके रहने से लेकर खान-पान के साथ स्वास्थ्य संबंधी देखभाल भी की जाती है। बुजुर्गों की सेवा ईश्वर सेवा के समान हैं, जिसका निर्वहन कर रहा हूं। शासन से मिलने वाली सभी सुविधाएं दी जाती हैं।
-प्रदीप कटियार, प्रबंधक, आधारशिला वृद्धाश्रम, फरेंदा