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मनरेगा : काम करना तो दूर कार्यस्थल पर भी नहीं जा रहे मजदूर

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अमडा उर्फ झूलनीपुर में कार्यस्थल से नदारद मजदूर।
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मनरेगा में फर्जी हाजिरी का खेल, पड़ताल में जिम्मेदारों की करतूत हुई उजागर
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कुछ कार्यस्थल पर फोटो खिंचवा कर लौट रहे, कुछ जा ही नहीं रहे काम करने
बढ़या मुस्तकीम गांव में कागज में दर्ज थे 100 मजदूर, मौके पर नहीं मिला एक भी
महराजगंज/निचलौल। मनरेगा में मजदूरों की हाजिरी के लिए फोटो और जियो टैगिंग के बावजूद भी जिम्मेदारों की ओर से जमकर धांधली की जा रही है। शनिवार को ब्लॉक क्षेत्र के कई गांवों में मनरेगा कार्य स्थलों की पड़ताल में जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आई। सबसे पहले विभागीय पोर्टल पर मजदूरों की संख्या के बारे में जानकारी ली गईं। इसके बाद मौके पर पड़ताल करने पर पता चला कि कई जगहों पर मजदूर कार्यस्थल पर गए ही नहीं। कुछ कार्यस्थल पर गए भी तो फोटो खिंचवाकर लौट गए।
पोर्टल पर मजदूरों की दर्ज संख्या की पड़ताल के लिए ब्लॉक से करीब 12 किलोमीटर दूर नारायणी नदी से सटे बढ़या मुस्तकीम गांव के पूरब सिवान में सुबह 11 बजे टीम पहुंची। जिम्मेदारों की ओर से कागजों में सुदामा के खेत से पश्चिम बंधा तक चकबंद कार्य कराया जा रहा है। कागज में यहां 100 मजदूर कार्य कर रहे थे लेकिन मौके पर कोई मजदूर नहीं था। वहीं रास्ते से गुजर रहे ग्रामीण और गन्ने की छिलाई कर रहे लोगों ने पूछताछ में बताया कि सुबह कुछ मजदूर चकबंद कार्य के लिए आए हुए थे। लेकिन फोटो खिंचवाने के बाद तत्काल लौट गए। दूसरे साइट छोटेलाल के खेत से भगवंत के खेत तक चकबंद कार्य पर भी यही नजारा देखने को मिला। यहां भी कागजों में 57 मजदूर कार्य करते दिखाए गए थे लेकिन मौके पर कोई नहीं था।
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दोपहर 12 बजे कुछ ऐसा ही नजारा अमडा उर्फ झूलनीपुर गांव में देखने को मिला। यहां पर बृजवासी के खेत से पूरब संजय के खेत तक चकबंद का कार्य जारी था। कागजों में 60 मजदूरों की हाजिरी लगाई गई थी लेकिन मौके कर कोई मजदूर नहीं था। चकबंद के पास खेत में दवा का छिड़काव कर रहे गांव निवासी किसान सुरेश ने बताया कि चकबंद पर आज कोई मजदूर नहीं आया था। न ही कोई काम हुआ है। सबसे हैरान करने वाले तथ्य अमडी में देखने को मिले। यहां पर कागजों में एक जगह मेन सड़क से नाला तक चकबंद कार्य में 105 मजदूरों की हाजिरी लगाई गई थी। जबकि दूसरे जगह जुगानी के खेत से देवान के खेत तक चकबंद कार्य कर 90 मजदूरों की हाजिरी लगाई गई थी। लेकिन मौके पर दोनों जगहों पर कोई मजदूर नहीं दिखा।
रास्ते से गुजर रहे एक ग्रामीण ने बताया कि चकबंद कार्य के नाम पर फर्जी मजदूरों की हाजिरी लगाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। क्योंकि चकबंद कार्य के नाम कर दो से तीन दिन बाद एक बार 10 से 15 मजदूर एक से दो घंटे के लिए आते हैं और सड़क की घास छिलाई कर लौट जाते हैं। बेलवा गांव में दिलीप के घर से उत्तर डिगही सिवान तक चकबंद कार्य पर 71 मजदूरों की हाजिरी लगाई गई थी लेकिन मौके कर कोई मजदूर नहीं था। इसी तरह दूसरे बेलवा गांव में ही शिवपूजन के खेत से डिगही सिवान तक चकबंद कार्य कर 50 मजदूरों की हाजिरी लगाई गई थी। यहां पर भी कोई मजदूर नहीं था। रास्ते से गुजर रही महिला सावित्री देवी ने बताया कि बीते तीन दिनों से सड़क पर काम नहीं हो रहा है।
निचलौल ब्लॉक के एपीओ शिवेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि प्रति दिन 252 रुपये मजदूरी तय है। मनरेगा में गड़बड़ी न करने के लिए जिम्मेदारों को सख्त नसीहत दी गई है। नियम के विपरीत कार्य होने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कोट
जिम्मेदार गांव में विकास करने के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। मनरेगा योजना तो उनके लिए काफी बेहतर बन चुकी है। क्योंकि मौके पर मजदूरों को न पहुंचने पर जिम्मेदार फोटो से फोटो खींचकर या फिर धुंधली तस्वीर अपलोड कर देते हैं।
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-गोविंदा देवी, ग्राम अमडी

कार्यस्थलों पर मजदूर मौजूद नहीं होते लेकिन उनके नाम पर ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर दी जाती है। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए लगाई गई फोटो भी विश्वसनीय नहीं होती है। कई बार कभी एक ही फोटो को बार-बार अपलोड किया जाता है तो कभी धुंधली या काली तस्वीरें अपलोड कर दी जाती है।
-सुरेश, ग्राम अमडी उर्फ झूलनीपुर
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