हर-हर गंगे का उद्घोष करके श्रद्धालुओं ने नारायणी, रोहिन, राप्ती और छोटी गंडक नदियों में लगाई डुबकी, किया दान
श्रद्धालुओं ने स्नान-दान करके परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की
महराजगंज। मौनी अमावस्या के अवसर पर जिले में नदियों के श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। रविवार को नारायणी नदी के संगमस्थल त्रिवेणी, रोहिन नदी के चानकी घाट, त्रिमोहानी घाट, घुघली में छोटी गंडक के बैकुंठी घाट और धानी बाजार में राप्ती नदी के किनारे हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान किया। त्रिवेणी में नारायणी नदी में भारी संख्या में यूपी, बिहार तथा नेपाल के श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। वहीं रोहिन नदी के चानकी घाट, त्रिमोहानी घाट समेत हर जगह श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। स्नान-दान करके श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की।
चौक बाजार प्रतिनिधि के अनुसार,
सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के तीन वन रेंज क्षेत्रों से होकर प्रवाहित रोहिन नदी के चानकी घाट पर रविवार को तड़के से ही श्रद्धालुओं के घाट पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। हर-हर गंगे के गगनभेदी उद्घोष करके श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। ज्योतिषी जगदम्बा पांडेय ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन सच्चे मन से गंगा स्नान करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है। इस दिन का स्नान विशेष फलदायी माना गया है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर कोतवाली और चौक पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। स्नान-ध्यान के बाद श्रद्धालुओं ने खरीदारी की और बच्चों ने मेले का भरपूर आनंद उठाया।
ठूठीबारी और निचलौल प्रतिनिधियों के अनुसार,
भारत-नेपाल की सीमा पर स्थित त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर सुख शांति की कामना की। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर पड़ोसी मुल्क नेपाल के नवलपरासी जिला स्थित पवित्र नारायणी नदी में डुबकी लगाने के लिए जनपद के ठूठीबारी, लक्ष्मीपुर खुर्द, रेगहियां, शीतलापुर, झुलनीपुर, बहुआर, बैठवलियां,गेडहवां, निचलौल, ओडवलियां, हनुमानगंज, जमुईकला, पिपरिहा, मैरी, गडौरा, बेलवां, डिगही, रामनगर, किशुनपुर, डगरुपुर, इटहियां, बरगदवां, परसामलिक और नेपाल के नवलपरासी, महेशपुर, परसौनी, रानीनगर, बेलाटारी, पिपरपाती, दाउन्ने, चोरमारा, वर्दघाट, सूर्यपूरा, बरघाट के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार से भारी संख्या में श्रद्धालुओं की टोलियों का शनिवार की दोपहर तक संगम तट पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। रविवार की भोर से ही श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे के जयकारे के साथ गंगा में डुबकी लगाकर गो दान, अन्न दान, वस्त्र दान किया। पंडित अंबरीश तिवारी ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, द्वापर युग की शुरुआत मौनी अमावस्या के दिन हुई थी। इस दिन मौन रहकर स्नान और दान करने से आत्मिक शुद्धि होती है। मान्यता है कि इस पुण्यस्नान का फल हजारों यज्ञ के बराबर होता है।
घुघली प्रतिनिधि के अनुसार,
मौनी अमावस्या के अवसर पर नगर स्थित छोटी गंडक के बैकुंठी घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जैसे-जैसे धूप खिली, स्नान को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। हर ओर ''हर-हर गंगे'' और ''जय गंगा मैया'' के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। वहीं श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
श्रद्धालुओं ने राधाकृष्ण मंदिर, बाल्मीकि आश्रम का किया दर्शन
ठूठीबारी। मौनी अमावस्या पर्व पर त्रिवेणी धाम स्थित नारायणी नदी में गंगा में स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने गह-गजराज मंदिर प्रांगण में शीश महल और नवनिर्मित राधा-कृष्ण मंदिर, वाल्मीकि आश्रम का दर्शन कर परिवार में सुख शांति की कामना की। इस दौरान शीशमहल व झूला पुल आकर्षक का केंद्र बना रहा।