निचलौल। कुपोषण को रोकने और खत्म करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की तमाम योजनाएं चल रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार देने से लेकर बच्चों को कुपोषण से बचाने की जानकारी तक दी जाती है। निचलौल ब्लॉक में 295 केंद्रों पर जुलाई महीने में 1353 कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है।
कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, ब्लॉक क्षेत्र में 295 आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए व गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार के लिए जागरूक करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित हैं। इन आंगनबाड़ी केंद्रों पर जहां शून्य से पांच साल तक के बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाता है, वहीं उनसे अनेक गतिविधियां भी करवाई जाती हैं। साथ ही महिलाओं को स्वस्थ रहने के लिए टिप्स दिए जाते हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों के कुपोषित होने की पहचान की जाती है। इनमें अगर नवजात बच्चे का जन्म के समय वजन ढाई किलोग्राम से कम हो और उसका कद भी 45 सेंटीमीटर से कम हो तो उसे कुपोषित माना जाता है। पिछले चार महीने के आंकड़ों पर नजर डाले तो देखा जाय की अप्रैल में कुपोषित बच्चों की संख्या 1537, मई में 1499, जून में 1358 जबकि जुलाई में 1353 संख्या है। अधिकांश कुपोषित बच्चे न्याय पंचायत मिश्रवलीया, बेलवा, गडौरा, बीसोखोर, ठूठीबारी और टिकुलहीया अंतर्गत गांवों में है।
प्रभारी सीडीपीओ गुंजनलता श्रीवास्तव ने कहा की बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए महिलाओं को जागरुक किया जा रहा है। समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। महिलाएं पौष्टिक आहार लें और नवजात बच्चों को स्तनपान अवश्य कराएं।