सीमावर्ती क्षेत्र में साइकिल से सामान लेकर जाते लोग।
महराजगंज। नेपाल से फिर मक्के की तस्करी शुरू हो गई है। बीते दिन तुर्की का मक्का बरामद हुआ है। इसे गोरखपुर मंडी और लखनऊ, कानपुर, आगरा भी भेजा जा रहा है।
रेट में अंतर की वजह से तस्कर इसका फायदा उठा रहे हैं। भारत में सरहद के रास्ते नेपाल से अब विदेशी मक्का भी सरहद पार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि मक्के की कीमत में दोगुने अंतर के चलते तस्कर भारतीय क्षेत्र में ला रहे हैं। सूत्रों की माने तो जनपद के नौतनवा, कोल्हुई, सोनौली, बरगदवा, परसामलिक, ठूठीबारी और निचलौल थाना क्षेत्र के सीमावर्ती गांव से अन्य सामानों की तस्करी हो रही है। लेकिन कुछ दिनों से मक्के की कीमत में दोगुने बचत को लेकर इसकी तस्करी तेज हो चुकी है।
तस्करी से जुड़े एक युवक ने बातचीत में बताया कि नेपाल में 30 से 40 रुपये प्रतिकिलो मक्का मिल जाता है। जबकि यह भारत में 90 से 100 रुपये प्रतिकिलो आसानी से बिक जाता है। अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में कड़ी निगरानी की जा रही है।
मुनाफा कमा रहे धंधेबाज : नेपाल और भारत में मक्का के दामों में दोगुने का अंतर है। भारत में एक-एक बोरी पहुंचाई जाती है। वहां यह 3000 रुपये की बिकती है। भारत में 9000 इस हिसाब से मक्का की तस्करी में लगे धंधेबाज प्रति बोरी 6000 रुपये तक कमा रहे हैं। तस्कर विदेशी मक्का को नेपाल में 30 से 40 रुपये प्रति किलो खरीदकर सरहद से सीमावर्ती गांव के गोदामों में डंप कर देते हैं।
फिर तस्कर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर छोटे-बड़े वाहनों की मदद से मक्के की खेप भारत लाते हैं। सीमावर्ती नगर और ग्रामीण बाजारों के साथ गोरखपुर, कानपुर सहित अन्य मंडियों में पहुंचाकर मोटी रकम कमा रहे हैं।