महराजगंज। बीते दिनों 47 नेपाली महिलाओं के दिल्ली से नेपाल और भारतीय दूतावास के सहयोग से नेपाल भेजा गया। नेपाल सरकार ने घरेलू कामगारों के कुवैत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया तो नेपाली एजेंटों ने दूसरा रास्ता ढूंढ़ लिया है। दुबई और नई दिल्ली के रास्ते एजेंट विजिट वीजा की आड़ में महिलाओं को कुवैत ले जा रहे हैं।
भारत के बड़े-बड़े शहरों में भी सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर यह सौदागर नेपाली लड़कियों को वरगला रहे हैं। मानव तस्करों के निशाने पर नेपाल में आर्थिक रूप से कमजोर लोग हैं। अक्सर बहकावे में आकर लड़कियां सरहद पर पहुंच भी जाती हैं।
समय-समय पर सुरक्षा एजेंसियां उनके मंसूबों पर पानी फेरकर लड़कियों को बाॅर्डर से वापस करती है। संदिग्ध दिखने पर पूछताछ के बाद उनको वापस करा दिया जाता है।
फॉरेन एम्प्लॉयमेंट रेस्क्यू नेपाल के अध्यक्ष इंद्रलाल गोले के अनुसार, नेपाली एजेंट दुबई जाने के बहाने महिलाओं को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विजिट वीजा पर भेजते हैं। हवाई अड्डे पर सेटिंग की जाती है और उन्हें 500 से एक हजार अमेरिकी डॉलर दिए जाते हैं, जिन्हें दुबई पहुंचते ही एजेंट वापस ले लेता है। साधारण कपड़े पहनकर हवाई अड्डे पर आते हैं। उन्हें भी सेटिंग के आधार पर जाने दिया जाता है। दुबई पहुंचने के बाद, उन्हें विजिट वीजा पर वापस कुवैत भेज दिया जाता है। कुवैती मालिक के घर पहुंचने के बाद, एक नेपाली महिला मजदूर का जीवन बंधक जैसा हो जाता है।
नेपाल म्याग्दी की एक महिला पांच महीने पहले कुवैत गई थी। विजिट वीजा पर कुवैत पहुंची लक्ष्मी ने रेस्क्यू के लिए आवेदन किया है। वह पोखरा के एक एजेंट के जरिये कुवैत पहुंची और कुवैती एजेंट के नेपाली एजेंट ने उसे नौकरी दिलाने का वादा किया था। वहां पर उसे परेशान किया जाने लगा।