मदरसे के शिक्षक ने चुकंदर की खेती कर दूर की आर्थिक तंगी
हर साल 50 हजार लगाकर करीब डेढ़ लाख रुपये मुनाफा कमा रहे
समय से मानदेय नहीं मिलने पर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
नौतनवां /महराजगंज। क्षेत्र के रेहरा गांव के टोला महुलानी निवासी राम अवध मौर्य चुकंदर की खेती कर परिवार का भरण पोषण कर अपनी आर्थिक समृद्धि बढ़ाने में लगे हुए हैं। भारत-नेपाल का सीमावर्ती गांव रेहरा के रहने वाले राम अवध मौर्य मदरसे में आधुनिक अध्यापक भी हैं। समय से मानदेय न मिलने पर आर्थिक रूप से परेशान रहते थे। उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए चुकंदर की खेती करने का मन बनाया। खेती करने के बाद समस्याएं ही दूर हो गईं।
राम अवध मौर्य ने बताया कि वर्ष 2016 से चुकंदर की खेती शुरू की। इससे अच्छी आमदनी होती है। खेती से होने वाली आय से परिवार खुशहाल है। उन्होंने बताया कि एमए, बीएड तक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद 2007 में एक मदरसे में आधुनिक अध्यापक हुआ। दो बच्चे कृष्ण देव तथा अस्मिता हैं। पत्नी यशोदा देवी गृहिणी हैं। बेटा कृष्ण देव कक्षा 11वीं तथा बेटी अस्मिता कक्षा 9वीं में पढ़ती हैं। समय से मानदेय न मिलने पर परिवार का भरण पोषण करने में समस्याएं आने लगीं तो आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए 45 डिस्मिल खेत में चुकंदर की खेती करनी शुरू की। पहले वर्ष तो अच्छी आय नहीं हुई तो घबराया नहीं, बल्कि धैर्य रखते हुए कार्य जारी रखा। दूसरे वर्ष से अच्छी आय होने लगी। चुकंदर की खेती से आय कर वह बच्चों की पढ़ाई के साथ साथ घर की माली हालत सुधारने लगी है। राम अवध मौर्या ने बताया कि चुकंदर की खेती से एक वर्ष की आय लगभग डेढ़ लाख रुपये तक हो जाती है। खेती में लगभग 50 हजार की लागत आती है। खेती में पत्नी यशोदा देवी भी हाथ बटाती हैं। उन्होंने बताया कि नौतनवां मंडी, रतनपुर, बरगदवा, सेवतरी अड्डा बाजार आदि स्थानीय बाजारों में इसको भेजा जाता है।
जिला कृषि अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि किसानों की खेती से आय दोगुनी करने के लिए योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। किसान मेले के माध्यम से कृषि संबंधी नवीनतम जानकारी दी जाती है।