नेपाल में सीमावर्ती क्षेत्र में चार से पांच हजार पशुओं की हो चुकी है मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। नेपाल सीमा से सटे नेपाल के रुपनदेही सहित अन्य जनपदों में पशुओं के लिए जानलेवा बीमारी लंपी वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। आर्धाखांची, पश्चिम बांगलुंग, बांके, बर्दिया, दांग देउसुरी, गुल्मी, कपिलवस्तु, पश्चिम नवलपरासी, पाल्पा, प्यूठान, रोल्पा, रुपनदेही जनपद में बीमारी कहर बरपा रही है। नेपाल में सीमावर्ती क्षेत्र में चार से पांच हजार पशुओं की मौत हो चुकी है। इसे देखते हुए भारतीय क्षेत्र के पशुपालक परेशान हैं, कहीं यह बीमार इस क्षेत्र में फैल न जाय।
जानकारी के अनुसार, नेपाल की खुली सीमा होने के कारण सीमावर्ती गांवों के पशु नेपाल में भी चरने के लिए पहुंच जाते हैं। ऐसे में यहां भी पशुओं के बीमारी की गिरफ्त में आने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद पशु चिकित्सा विभाग गंभीर नहीं है। अगर यही हाल रहा तो जिले में इस संक्रमित बीमारी के फैलते देर नहीं लगेगी। जिससे पशु पालकों को बड़ी क्षति से गुजरना पड़ेगा। पशु डॉक्टरों के अनुसार, मनुष्य की तरह से पशुओं में भी कई प्रकार की संक्रामक बीमारी फैलती है। इसी साल लंपी वायरस ने देश के राजस्थान सहित कई राज्यों में लंपी वायरस के प्रकोप से बड़ी संख्या में पशु बीमार हुए थे और न जाने कितने पशुओं की मौत हो गई थी। जिससे किसानों का बड़ा नुकसान हुआ।
हालांकि जिले में इस वायरस से प्रभावित कोई मामला सामने नहीं आया था, लेकिन अब बीमारी का खतरा मंडराने लगा है। कारण पिछले कई दिनों से सीमा से सटे नेपाल के 12 जनपदों में लंपी वायरस पशुओं पर कहर बनकर टूट रहा है। नेपाल में लगने वाली जिले की 84 किलोमीटर सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। नियमित दोनों देशों के पशु एक होकर खाली स्थानों पर चरते हुए देखे जाते हैं।
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जांच न जागरुकता, कैसे रोकेंगे बीमारी
पशु चिकित्सा विभाग के लोग यह जान रहे हैं कि नेपाल में गाय प्रजाति की पशुओं में लंपी वायरस भयावह रूप ले चुका। इसके बाद भी न तो पशुपालकों को जागरूक करने का अभियान शुरू किया है। न ही पशुपालकों को यह जानकारी दी जा रही है कि यह बीमारी कैसी है और क्या लक्षण हैं। साथ ही एहतियातन भी कहीं चेकिंग शुरू नहीं हुई है, जिससे बीमारी के खतरे को रोका जा सके।
जिले में हैं इतनी गाय और भैंस
पशु चिकित्सा विभाग की ओर से हुए पशुओं के सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक जिले में गाय, बैल, भैंस और बछड़ों की संख्या करीब करीब 2,49,700 है। यानी अगर लंपी वायरस का फैलाव होता है तो इनकी चपेट में आने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
बीमारी के लक्षण
डॉ. दिलीप सिंह ने बताया कि लंपी त्वचा संबंधी वायरल बीमारी होती है, जो गाय, भैंसों में होती है। इसमें शरीर पर गांठें बनने लगती हैं। खासकर सिर, गर्दन और जननांगों के आसपास। धीरे-धीरे ये गांठें बड़ी होने लगती हैं और घाव का रूप ले लेती हैं। एलएसडी वायरस मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से आसानी से फैलता है। साथ ही ये दूषित पानी, लार और चारे के माध्यम से भी फैलता है।
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जिले में 57 हजार पशुओं को टीका लग चुका है। टीका लगने के बाद एक साल तक बीमारी नहीं होती है। विभाग की ओर से सतर्कता बढ़ा दी गई है। महराजगंज जिले में लंपी का कोई प्रभाव नहीं है।
डॉ. दिलीप सिंह, नोडल अधिकारी, लंपी
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पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही है। जब से सुना है कि नेपाल में पशुओं को लंपी बीमारी हो रही है, डर सता रहा है कि कहीं यहां भी पशु चपेट में न आ जाएं।
नाथू यादव, पशुपालक, जिगिना
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पशुपालन विभाग को इस दिशा में कारगर कदम उठाया जाना चाहिए। पशुओं की सुरक्षा को लेकर नजदीक के अस्पताल में जाकर डॉक्टर से सलाह लिया हूं। यहां ऐसी समस्या नहीं है, लेकिन पडोसी देश में पशुओं की बीमारी से डर लग रहा है।
सत्यनारायण, पशुपालक, जिगिना
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नेपाल में लंपी से 50 हजार से ज्यादा पशुओं की हो चुकी है मौत
महराजगंज। नेपाल में लंपी रोग (गांठदार त्वचा) रोग से मरने वाले जानवरों की संख्या 50,000 से अधिक हो गई है। पशु सेवा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 12 जुलाई तक देश में 50 हजार 826 गाय, बछड़े, भैंस और भैंसों की मौत हो चुकी है। विभाग के मुताबिक, देश में कुल 10 लाख 88 हजार जानवर संक्रमित हो चुके हैं, 7 लाख 89 हजार ठीक हो चुके हैं और 2 लाख 48 हजार अभी भी संक्रमित हैं।
विभाग के अनुसार, कुल 350,000 जानवरों को गांठदार त्वचा रोग के खिलाफ टीका लगाया गया है। विभाग के मुताबिक अब तक कोशी प्रांत में 5 हजार 42, मधेस में एक हजार 700, वागमती में 3 हजार 476, गंडकी में 2 हजार 295, लुंबिनी में 4 हजार, कर्णाली में 8 हजार 703 और 25 हजार 610 जानवरों की मौत हो चुकी है। मुख्य सचिव वैकुंठ आर्यल ने बताया कि केंद्रीय निगरानी एवं मूल्यांकन समिति की बैठक में वैक्सीन लगाने का निर्देश दिया गया है।
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