सदर सहित अन्य तहसीलों में 1200 से अधिक आवेदन पत्र जमा हो चुके
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में ऑफिस खोलकर चिट फंड कंपनियां रुपये नहीं लोगों के सपने लेकर भागी हैं। कम समय में दोगुना लाभ मिलने के चक्कर में लोगों ने अपनी जमा-पूंजी गंवा दी। अब शासन के निर्देश पर डूबी हुई रकम वापस मिलने की उम्मीद लोगों में जगी है। इसलिए पीड़ित तहसील मुख्यालयों में पहुंचकर आवेदन जमा करा रहे हैं। सदर सहित अन्य तहसीलों में 1200 से अधिक आवेदन पत्र जमा हो चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी के आवेदन पत्रों को इकट्ठा करने के बाद ऑनलाइन डाटा फीड करके शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके लिए कोई अंतिम समय सीमा नहीं तय की गई है।
रुपये लेकर भाग गई कंपनी, सदमे में नींद नहीं आती थी
बल्लो खास के रहने वाले रघुनाथ जायसवाल 10 फरवरी 2013 में चार लाख रुपये चिटफंड कंपनी में जमा किए थे। उनको एजेंट ने बताया था कि साढ़े पांच साल में ही रकम दोगुनी हो जाएगी। वर्ष 2019 में रकम का भुगतान लेने पहुंचा तो पता चला की कंपनी काम समेट कर फरार हो गई है। सदमे के कारण 15 दिन तक रात में नींद नहीं आई। उन्होंने बताया कि दुकान चला कर रकम जमा की थी। अपने पैसे पाने के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है।
एक सप्ताह तक तबीयत खराब हो गई थी
खुटहा गांव के रहने वाले प्रमोद कुमार भी सदर तहसील में फार्म जमा करने आए थे, बेहद परेशान थे। 30 मार्च 2017 को 42,000 रुपये जमा किए थे, लेकिन चिट फंड कंपनी बंद हो गई। रकम नहीं मिलने से ऐसा सदमा लगा कि एक सप्ताह तक तबीयत खराब रही। अब सरकार ने पहल की है तो उम्मीद जगी है। बृहस्पतिवार को तहसील में फार्म जमा किया गया है।
इन कंपनियों में लोगों ने जमा कराई है रकम
पियरलेस, पवन, स्काईलैंड, कल्पतरू, जीसीए, लीला लीजिंग एंड हाउसिंग फाइनेंस, यक्ष फाइनेंस सहित एक दर्जन से अधिक कंपनियों में लोगों ने रकम जमा कराई है। इनमें उन्हीं कंपनियों के लिए ज्यादातर आवेदन आ रहे हैं, जो वर्ष 2013 के बाद खुली थीं। तहसील कर्मचारियों का कहना है कि अभी तक 2013 के बाद ही आवेदन पत्र आए हैं।
रुपये डूबे तो कई दिन घर से नहीं निकले
गिरिटीया गांव के जोखन ने बताया कि वर्ष 2014 में 25 हजार रुपये जमा किए थे, लेकिन चिट फंड कंपनी का कार्यालय बंद हो गया। दिन-रात मेहनत करके रकम जुटाई। एक एजेंट के झांसे में आकर रुपये जमा करा दिए। तीन साल बाद मालूम हुआ कि जिस कंपनी में रुपये जमा हुए, वह तो भाग गई। परेशान होकर वह कई दिनों तक घर से बाहर निकलने से बचता रहा।
दावा : लोगों की डूबी रकम दो करोड़ से अधिक
जिले में एक दर्जन से अधिक चिट फंड कंपनियां खोलकर संचालकों और कर्मचारियों ने लोगों को कम समय में अधिक लाभ देने का झांसा दिया। इस चक्कर में पड़ कर लोगों ने मेहनत से कमाई पूंजी जमा कराई। किसी ने बेटी की शादी, तो किसी ने बच्चों की पढ़ाई तो किसी ने आगे चलकर मकान बनवाने का सपना संजोया, लेकिन रुपये जमा कराने के बाद भुगतान का समय आया तो कंपनियां बोरिया-बिस्तर समेटकर लापता हो गईं। इसके बाद लोग बांड, रसीद और अन्य कागजात लेकर दर-दर भटकते रहे। लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिल सकी। शासन से निर्देश के बाद जब प्रक्रिया शुरू हुई है तो तहसीलों में लाइन लग गई है।
बृहस्पतिवार को सदर तहसील सहित अन्य जगहों पर कुल 1200 आवेदन जमा हो चुके थे। कर्मचारियों के अनुसार, इन आवेदनों में पांच हजार से लेकर दो-दो लाख रुपये तक का जिक्र है। अधिकांश ग्राहकों ने 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक जमा कराए हैं। एक अनुमान के अनुसार, करीब दो करोड़ रुपये की वापसी के लिए आवेदन हो चुका है। कर्मचारियों का कहना है कि अभी कोई अंतिम तिथि समय सीमा तय नहीं है। इसलिए आवेदन पत्र लिए जाएंगे।
सभी तहसीलों में आवेदन पत्र जमा कराए जा रहे हैं। इसके अनुसार ही डाटा तैयार किया जाएगा। तभी यह तय हो सकेगा कि लगभग कितनी रकम लेकर चिट फंड कंपनियां भागी हैं। शासन के निर्देश पर यह कार्रवाई की जा रही है।
डॉ. पंकज कुमार वर्मा, अपर जिलाधिकारी