बागापार। सदर ब्लाॅक के ग्राम केवलापुर खुर्द में आयोजित नौ दिवसीय श्रीश्री शतचंडी महायज्ञ में रामलीला मंचन के दौरान कलाकारों ने धनुष यज्ञ का मंचन किया। मंचन में सीता स्वयंवर प्रमुख आकर्षण रहा। मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि महाराजा जनक ने जनकपुरी में धनुष यज्ञ रखा। तमाम देशों के राजा- महाराजा धनुष यज्ञ में शामिल हुए।
स्वयंवर में राजा-महाराजाओं ने शिव धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए। यहां तक कि वह धनुष को हिला तक नहीं पाए। कई राजा धरती पर औंधे मुंह गिर पड़े। इस पर महाराजा जनक दुखी होकर कहते हैं कि लगता है धरती वीरों से खाली हो गई है। इस पर महर्षि विश्वामित्र व प्रभु श्रीराम संग धनुष यज्ञ में शामिल लक्ष्मण क्रोधित हो उठे। वह ललकारते हुए धनुष उठाने बढ़े। उन्हें विश्वामित्र ने रोका और श्रीराम को धनुष उठाने को कहा। श्रीराम ने भगवान शिव के धनुष को प्रणाम किया और धनुष उठाया।
प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गई। आकाश से पुष्पा वर्षा हुई। धनुष टूटने से धरती कांप उठी। भगवान परशुराम को धनुष टूटने की जानकारी मिली, तो वह क्रोधित होकर जनकपुरी पहुंचे। वहां लक्ष्मण और परशुराम का ओजस्वी संवाद हुआ। भगवान श्रीराम ने क्रोधित परशुराम को शांत करते हुए कहा कि धनुष तोड़ने वाला कोई आपका दास ही है। यह दृश्य देखकर लोग भाव विभोर हो गए। इस अवसर पर ग्राम प्रधान परीखन गुप्ता, समाजसेवी अंगद चौहान, हरीश आर्य, अवध नारायण मिश्र, राजकुमार राय, सुनील, उमेश यादव, गोपाल पासवान, पिंटू यादव, श्यामू, विनोद गुप्ता, जितेंद्र सिंह मौजूद रहे।